बालू माफिया ने सोख ली जयंती नदी की धार, सूखे का संकट
देवघर : किसी भी क्षेत्र की संस्कृति व समृद्धि वहां की नदियों से जुड़ी होती है. मानव सभ्यता का विकास भी नदियों के किनारे हुआ है. लेकिन, कालांतर से नदियों का भरपूर दोहन हो रहा है. बालू का उठाव हो रहा है. कई जगह नदियों की जमीन पर अतिक्रमण किया जा रहा है. नदियों में […]
देवघर : किसी भी क्षेत्र की संस्कृति व समृद्धि वहां की नदियों से जुड़ी होती है. मानव सभ्यता का विकास भी नदियों के किनारे हुआ है. लेकिन, कालांतर से नदियों का भरपूर दोहन हो रहा है. बालू का उठाव हो रहा है. कई जगह नदियों की जमीन पर अतिक्रमण किया जा रहा है. नदियों में बोरिंग पर पानी निकाला जा रहा है.
नदियों के संरक्षण पर कोई काम नहीं हो रहा है. नतीजा साफ है, आज नदी रूपी वही जीवनधारा सूख रही है. गरमी के मौसम में हर जगह पेयजल की किल्लत है. नदियाें में भी पानी नहीं है. अगर समय रहते हम नहीं चेते तो आने वाले समय में यह समस्या और भयावह हो जायेगी. नदियों के प्रवाह को रोकना यानी मानव सभ्यता के विकास को रोकना बन जायेगा. ‘मत रोको प्रवाह’ में आज की कड़ी में पढ़ें जयंती नदी पर रिपोर्ट-
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