भोजपुरी में भी बन रही पारिवारिक फिल्में

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देवघर: साईं मोर बाबा फिल्म से अपनी करियर की शुरुआत करने वाली कलाकार अर्चना सिंह ने पीएचडी करने के बाद फिल्म लाइन में आयीं. अपनी आगामी फिल्म की सफलता के लिए बुधवार को बाबा मंदिर में पूजा अर्चना के लिए देवघर पहुंचीं. पूजा के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की. बातचीत के मुख्य अंश : […]

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देवघर: साईं मोर बाबा फिल्म से अपनी करियर की शुरुआत करने वाली कलाकार अर्चना सिंह ने पीएचडी करने के बाद फिल्म लाइन में आयीं. अपनी आगामी फिल्म की सफलता के लिए बुधवार को बाबा मंदिर में पूजा अर्चना के लिए देवघर पहुंचीं. पूजा के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की. बातचीत के मुख्य अंश :
पीएचइडी करने के बाद फिल्म की ओर झुकाव का कारण?
मेरे परिवार के किसी भी सदस्य का फिल्म लाइन से दूर-दूर का नाता नहीं है. फिल्मों की ओर मेरा झुकाव बचपन से ही रहा. स्कूलों में पढ़ाई के साथ नाटक में छोटे-छोटे रोल किया करती थी. पढ़ाई के तरफ मैंने ध्यान लगाया और पीएचडी की. लेकिन ऐक्टिंग करने का कीड़ा मेरे अंदर कहीं न कहीं जिंदा था. और पढ़ाई करने के बाद एक्टिंग करने की मैंने ठानी और आज इस मुकाम पर हैं.
इस मुकाम तक पहुंचने में किसका अहम योगदान आप मानते हैं?
अभी करियर की शुरुआत ही हुई है. 12 फ़िल्मों में मैंने अब तक काम किया है. भगवान का आशीर्वाद है कि दर्शकों को मेरा किरदार पसंद आ रहा है. इस सफर में मेरे पूरे परिवार का सहयोग हमेशा से मिलता रहा है. और विश्वास करती हूं कि आगे भी रहेगा. अब तो मेरे परिवार में एक ओर नए सदस्य जुड़ गए हैं और वे हैं मेरे दर्शक.
क्या कारण है कि आप निगेटिव रोल ज्यादा निभा रही है?
अभी तक मैंने जितने रोल किये हैं, उनमें एक ही फ़िल्म में दोनों शेड्स हैं. फिल्म की शुरुआत में निगेटिव और अंत में पॉजिटीव. जबकि पॉजिटीव में सिर्फ एक ही तरह के रोल करने का मौका मिलता है. साथ ही हर इंसान अपने आप को हीरो मानता है. अपने स्वभाव से हटकर गुंडा का जब किरदार निभाता है तो उसे परेशानी होती है. इस विपरीत स्थिति में अपने किरदार को सफलता पूर्वक निभाना एक चेलेंज होता है जो हर कोई नहीं कर सकता है.
भोजपुरी फिल्म के नाम से ही क्यों भड़कते हैं लोग?
अब लोगों की धारणा बदल चुकी है. पहले लोग भोजपुरी फिल्में सपरिवार देखना नहीं चाहते थे. अब हर कोई एक्टर से लेकर डायरेक्टर तक पारिवारिक फिल्में बनाना चाहते हैं. अच्छी कहानी, अच्छे गाने का चुनाव किया जा रहा है ताकि लोग एक साथ बैठकर फिल्म देख सकें. पांच मई को मेरी आने वाली फिल्म शहंशाह रिलीज हो रही है, जिसमें हीरो रवि किशन हैं.
आगे कौन सा किरदार निभाने की इच्छा है?
मैं एक क्रूर लेडी डॉन की भूमिका निभाना चाहती हूं, जिसमें घोड़े की सवारी हो, गोली बंदूक से मौत का खेल हो. एक अच्छे स्क्रिप्ट की तलाश में हूँ. ये मेरा ड्रीम रोल होगा.
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