उदासीनता: सारवां के उच्च शिक्षा का केंद्र प्लस टू विद्यालय में समस्याएं, संसाधन के अभाव में हो रही पढ़ाई

Updated:
विज्ञापन

सारवां: प्रखंड क्षेत्र के एकमात्र उच्च शिक्षा का केंद्र प्लस टू उच्च विद्यालय सारवां आज समस्याओं की गिरफ्त में अपनी बदहाली का दास्तां बयां कर रहा है. सन 1948 में विद्यालय की स्थापना की गई थी जब सारवां के लोगों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये देवघर की ओर रुख करना पड़ता था. उस […]

विज्ञापन
सारवां: प्रखंड क्षेत्र के एकमात्र उच्च शिक्षा का केंद्र प्लस टू उच्च विद्यालय सारवां आज समस्याओं की गिरफ्त में अपनी बदहाली का दास्तां बयां कर रहा है. सन 1948 में विद्यालय की स्थापना की गई थी जब सारवां के लोगों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये देवघर की ओर रुख करना पड़ता था.

उस समय अभिभावकों की माली हालत इतनी दयनीय थी कि विरले ही अपने बच्चों को देवघर में रखकर शिक्षा की व्यवस्था कर पाते. तत्कालीन शिक्षाविद शंभुनाथ बलियासे, नुनुलाल पत्रलेख, जमींदार मर्दन सिंह, रघुनाथ पोद्दार आदि सारवां के दर्जनों तत्कालीन प्रबुद्धजनों द्वारा चंदा एकत्र कर खपरैल मकान बनाकर पठन-पाठन सुनिश्चित किया गया था. विद्यालय निरंतर प्रगति पर बढ़ता गया एवं शिक्षा के मामले में जिले के विद्यालयों को कड़ी चुनौती देती थी. लेकिन आज वही विद्यालय अपनी समस्याओं से जूझ रहा है.

छात्रों ने जानकारी देते बताया कि सुरक्षा के लिये एक अदद चहारदीवारी के नहीं बन पाने से दिन भर तीन पहिया चार पहिया वाहनों का प्रांगण से आना जाना लगा रहता है जिससे पढ़ाई में बाधा पहुंचती है. वहीं खुला मैदान रहने के कारण विद्यालय परिसर में ग्रामीणों द्वारा गंदगी फैला दी जाती है जिस कारण वहां से गुजरना दूभर हो जाता है. वहीं आवारा किस्म के लोगों द्वारा शराब पीकर पूरे मैदान में बोतल फोड़ दिये जाते हैं जिसके कारण छात्र-छात्राओं का अक्सर टूटे कांच से पैर कटते रहते हैं. वहीं विद्यालय परिसर में शौचालय एवं पेयजल की घोर किल्लत है. छात्रों को प्यास बुझाने के लिये दुखियानाथ मंदिर जाना पड़ता है. सबसे बड़ी कठिनाई कमरों की है जिसके चलते उन लोगों को बरामदे पर बैठकर पठन-पाठन करना पड़ता है. विषयवार कक्षा के अनुरूप शिक्षक की कमी के चलते बच्चों की कक्षा बाधित हो ती है. इसका सीधा प्रभाव छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ता है. लोगों ने सरकार व विभाग से अविलंब चाहरदीवारी के निर्माण के साथ-साथ पेयजल, शौचालय, कमरा व विषयवार शिक्षक की प्रतिनियुक्ति की मांग की है.
क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक
प्रधानाध्यापक किसलय ने कहा स्कूल में चहारदीवारी नहीं रहने के चलते काफी कठिनाई होती है. बच्चों की तादाद काफी अधिक है और विषयवार शिक्षक की कमी है. कमरों की संख्या काफी कम रहने के चलते छात्र-छात्राओं को बरामदे में बैठ कर पठन-पाठन करना पड़ता है. चहारदीवारी नहीं रहना सुरक्षा की दृष्टि से ठीक तो नहीं, पर बाध्यता है. इसकी जानकारी मेरे पूर्व के प्रधानाध्यापक के अलावा मैंने भी विभाग को दी है. कार्य तो विभाग ही करा सकती है.
विधायक बादल ने कहा
जरमुंडी विधायक बादल ने कहा सौ दिन के अंदर शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलेगा. प्लस टू स्कूल में चाहरदीवारी का निर्माण कराया जाएगा. इसके लिये सारवां के अभिभावकों के साथ बैठक कर निर्णय लिया जायेगा.
कहते हैं प्रमुख
प्रमुख मुकेश कुमार ने कहा कि प्रखंड का सबसे पुराना उच्च शिक्षा के केंद्र की बदहाली को देख काफी दुख होता है. अविलंब चाहरदीवारी के साथ आवश्यकता के अनुसार कमरों का निर्माण कराया जाय और विभाग विषयवार शिक्षक की कमी को पूरा करे.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola