साइमन परिवार का रहा है लिट्टीपाड़ा पर दबदबा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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समय बतायेगा भाजपा के लिए लिट्टीपाड़ा में उनकी डगर देवघर : लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा का राह आसान नहीं है. क्योंकि 1980 के बाद से जितने भी चुनाव लिट्टीपाड़ा सीट के लिए हुए हैं, सभी में झामुमो प्रत्याशी की जीत हुई है. यह विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व है. इस सीट पर […]
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समय बतायेगा भाजपा के लिए लिट्टीपाड़ा में उनकी डगर
देवघर : लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा का राह आसान नहीं है. क्योंकि 1980 के बाद से जितने भी चुनाव लिट्टीपाड़ा सीट के लिए हुए हैं, सभी में झामुमो प्रत्याशी की जीत हुई है. यह विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व है. इस सीट पर झामुमो की पकड़ जबरदस्त है. इसके अलावा झामुमो प्रत्याशी के रूप में इस सीट पर साइमन परिवार का खासा दबदबा रहा है. यही कारण है कि 1977 से 2009 तक के आठ चुनाव में चार बार साइमन मरांडी और चार बार उनकी पत्नी सुशीला हांसदा चुनाव जीतीं.
लिट्टीपाड़ा में झामुमो अहम है प्रत्याशी नहीं : जो चुनाव परिणाम अब तक के लिट्टीपाड़ा विधानसभा चुनाव के आये हैं. उनमें झामुमो और उनका सिंबल ही अहम रहा है, इनके लिए प्रत्याशी खासा महत्व नहीं रखते.
साइमन परिवार का रहा…
इसका उदाहरण है कि 2014 के चुनाव में लगातार चार बार चुनाव जीते साइमन मरांडी ने झामुमो छोड़ी और भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया लेकिन वे चुनाव हार गये. इस चुनाव में भी झामुमो के प्रत्याशी डॉ अनिल मुर्मू चुनाव जीते.
दो दोस्त टकरायेंगे लिट्टापाड़ा में
इस बार एक खास समीकरण यह बन रहा है कि साइमन मरांडी और हेमलाल मुर्मू वर्षों झामुमो में साथ रहे. दोनों में अच्छी दोस्ती रही है. लेकिन राजनीतिक में अभी दोनों दो ध्रुव के हैं. हेमलाल इस बार भाजपा की टिकट पर साइमन को टक्कर देंगे. हालांकि साइमन भी कुछ दिनों के लिए भाजपा में आये थे. लेकिन हाल ही में उन्होंने भाजपा छोड़ दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. लेकिन झामुमो ने उन्हें पुराने घर में वापस इंट्री दे दी.
भाजपा विकास को मुद्दा बनाकर मैदान में
उधर, झामुमो के गढ़ पर फतह हासिल करने के लिए भाजपा ने हेमलाल पर दावं खेला है. पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव में जनता के बीच जा रही है. चुनाव की घोषणा से पूर्व ही झारखंड सरकार और स्वयं सीएम ने लिट्टीपाड़ा को फोकस करके आदिवासियों को एकजुट करने का प्रयास किया. उनके बीच यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि आदिवासियों का विकास भाजपा ही कर सकती है. कई योजनाओं की भी इस इलाके में मंजूरी दी गयी.
बॉक्स
1967 से अब तक हुए चुनाव परिणाम झामुमो का दबदबा
वर्ष विजयी प्रत्याशी दल
1967 बी मुर्मू निर्दलीय
1972 सोम मुर्मू बिहार प्रांत हूल झारखंड
1977 साइमन मरांडी निर्दलीय
1980 साइमन मरांडी झामुमो
1985 साइमन मरांडी झामुमो
1990 सुशीला हांसदा झामुमो
1995 सुशीला हांसदा झामुमो
2000 सुशीला हांसदा झामुमो
2005 सुशीला हांसदा झामुमो
2009 साइमन मरांडी झामुमो
2014 डॉ अनिल मुर्मू झामुमो
लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट पर 1980 से 2009 तक रहा झामुमो का कब्जा
चार बार साइमन मरांडी की पत्नी सुशीला हांसदा तथा खुद साइमन चार बार रह चुके हैं विधायक
2014 में झामुमो छोड़ भाजपा में गये और हारे
अब तक तीन बार दूसरे स्थान पर ही है भाजपा
डॉ अनिल मुर्मू झामुमो की टिकट पर लड़े और जीते
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