स्वामी जी ने दुनिया को भारत दर्शन कराया

Published at :22 Sep 2013 8:24 AM (IST)
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स्वामी जी ने दुनिया को भारत दर्शन कराया

देवघर: स्वामी विवेकानंद की शतार्ध जन्म वर्ष समारोह पर रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ देवघर में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय सेमिनार के अंतिम दिन वक्ताओं के साथ-साथ छात्रों ने भी अपने-अपने विचारों से लोगों को अवगत कराया. कार्यक्रम की शुरुआत विद्यापीठ के छात्रों ने गीत प्रस्तुत कर किया. ‘विविधता में एकता : 21वीं सदी की चुनौतियों का […]

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देवघर: स्वामी विवेकानंद की शतार्ध जन्म वर्ष समारोह पर रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ देवघर में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय सेमिनार के अंतिम दिन वक्ताओं के साथ-साथ छात्रों ने भी अपने-अपने विचारों से लोगों को अवगत कराया.

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यापीठ के छात्रों ने गीत प्रस्तुत कर किया. ‘विविधता में एकता : 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता’ (यूनिटी इन डॉवर्सिटी : स्वामी विवेकानंद रिलेबेंस टू मीट द चैलेंजेस ऑफ 21 सेंचुरी) विषय पर विशिष्ट अतिथि हिंदी विद्यापीठ देवघर के व्यवस्थापक कृष्णानंद झा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पहली बार शिकागो की सभा में ऐतिहासिक भाषण से दुनिया को भारत दर्शन से अवगत कराया था. तब विश्व ने भी भारतीय दर्शन की व्यापकता को समझा. स्वामी जी हमेशा अशिक्षा को दूर करने एवं गरीबी से मुक्ति के लिए चिंतन किया करते थे. पहली बार संन्यासियों को संगठित कर शिक्षा प्रचार-प्रसार का काम किया.

संगोष्ठी में देवघर कॉलेज देवघर के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो कमल किशोर सिंह ने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान हमें स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता के मध्य तलाशनी होगी. हम स्वयं कुछ क्षण स्वामी जी के कालखंड में खड़े होकर चिंतन करें. व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय, धार्मिक, आर्थिक व वैश्विक विषयों पर स्वामी जी का आख्यान मानव मात्र के लिए अमूल्य धरोहर है. रेड रोज स्कूल देवघर के प्रिंसिपल राम सेवक सिंह गुंजन ने कहा कि भारत देश विविधता में एकता का अच्छा उदाहरण है. यहां छह नास्तिक समूह, छह धार्मिक समूह, 1650 भाषाएं, सैकड़ों बोलियां बोली जाती हैं लेकिन वर्तमान समय में नैतिक कम और आत्म केंद्रित राजनीति में चुनौतियों का मुकाबला आसान नहीं है.

ऐसे में स्वामी विवेकानंद के विचार एवं दर्शन से समाज का बदलाव संभव है. निर्मला कॉलेज रांची की रिटायर्ड प्रो डॉ रतना बनर्जी, एसजे एकेडमी के प्रिंसिपल शेखर नाथ झा एवं फादर एंटोनी राज एसजे ने भी विविधता में एकता के रूप को उदाहरण के जरिये समझाया. मंच संचालन शिक्षक मणिकांत झा ने किया. कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी बिहार एवं झारखंड सरकार के सुरक्षा सलाहकार डॉ डीएन गौतम, आरके मठ एवं आरके मिशन सेवाश्रम इलाहाबाद के सचिव स्वामी निखिलानंद जी महाराज, आरके मिशन विद्यापीठ देवघर के सचिव स्वामी त्याग रूपानंद जी महाराज सहित झारखंड-बंगाल के प्रतिनिधिगण एवं स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्रएं उपस्थित थे.

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