पिता के जन्मदिन पर, बेटे को राष्ट्रीय पुरस्कार

Updated at : 06 Sep 2018 3:56 AM (IST)
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पिता के जन्मदिन पर, बेटे को राष्ट्रीय पुरस्कार

देवघर : राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविंद राज जेजवाड़े को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा. इनके पिता हरिनारायण जेजवाड़े का जन्मदिन आज ही है. पिता का जन्मदिन एवं बेटे को शिक्षक का सर्वोच्च पुरस्कार मिलने से उनके पिता हरिनारायण जेजवाड़े काफी उत्साहित हैं. पिता ने कहा […]

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देवघर : राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविंद राज जेजवाड़े को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा. इनके पिता हरिनारायण जेजवाड़े का जन्मदिन आज ही है. पिता का जन्मदिन एवं बेटे को शिक्षक का सर्वोच्च पुरस्कार मिलने से उनके पिता हरिनारायण जेजवाड़े काफी उत्साहित हैं. पिता ने कहा कि बेटे को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना निश्चित रूप से बड़े खुशी की बात है. यह अवार्ड मेरे बेटे को मिलेगा, इस बारे में कभी सोचा भी नहीं था.

उसने बच्चों को पढ़ाने के लिए गांवों में शिक्षा का अलख जगाया है. बड़े भाई अनंत राज जेजवाड़े ने कहा कि पिता के जन्मदिन पर छोटे भाई को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना गर्व की बात है. बुधवार को दिन के 11.40 बजे अवार्ड मिलने के बाद करीब 12 बजे सबसे पहले मुझे फोन कर इसकी जानकारी दी है. उसके बाद घर के अन्य लोगों से बात की. बहू चंदा जेजवाड़े ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार की सूची में नाम शामिल होने के बाद बधाई देने वालों का तांता लगा रहा. बताया कि अरविंद शुरू से ही बच्चों के शिक्षा के प्रति समर्पित रहा है. आज के युवाओं को इनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है.

नये तरीके से बच्चों में पढ़ाई के प्रति
रुचि जगाई : जेजवाड़े
सबसे कम उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले अरविंद राज जेजवाड़े ने कहा कि पहले 330 शिक्षकों काे यह पुरस्कार दिया जाता था, लेकिन पुरस्कार की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर इसकी संख्या 45 कर दी गयी है. महज 35 साल में पुरस्कार पाने से उत्साहित जेजवाड़े ने कहा कि जब मैं शिक्षक के तौर पर गोपालपुर के प्राथमिक स्कूल में पहुंचा तो वहां की स्थिति अच्छी नहीं थी और बच्चे स्कूल नहीं आना चाहते थे. लेकिन मैंने बच्चों को नये तरीके से पढ़ाना शुरू किया.
फूल, पत्ती के जरिये बच्चों को पढ़ाने पर धीरे-धीरे उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ने लगी. फिर बच्चों के अभिभावकों का भी स्कूल के प्रति भरोसा बढ़ा. गणित सीखाने के लिए भी नया प्रयोग किया. इसके बाद समाज को एकजुट करने का काम किया और स्कूल में शौचालय, इंफ्रास्ट्रक्टर का विकास हुआ. गांव के लोगों को घरों में शौचालय बनाने के लिए जागरुक किया और आज हमारे स्कूल में ड्रॉप आउट रेट काफी कम हो गया है और स्कूल के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है.
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