1978 के एग्रीमेंट का पालन नहीं कर रही बंगाल सरकार

Updated at : 07 Aug 2018 9:09 AM (IST)
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1978 के एग्रीमेंट का पालन नहीं कर रही बंगाल सरकार

1978 के एग्रीमेंट का पालन नहीं कर रही बंगाल सरकार देवघर : दुमका के मसानजोर डैम का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में छाया रहा. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा. कहा : बंगाल की सीएम झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का काम कर रही हैं. मसानजोर […]

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1978 के एग्रीमेंट का पालन नहीं कर रही बंगाल सरकार

देवघर : दुमका के मसानजोर डैम का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में छाया रहा. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा. कहा : बंगाल की सीएम झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का काम कर रही हैं.

मसानजोर डैम को लेकर 1978 में तत्कालीन बिहार के सीएम कर्पूरी ठाकुर व बंगाल के सीएम ज्योति बसु ने जो एग्रीमेंट साइन किया था. उस एग्रीमेंट का अनुपालन आज तक बंगाल सरकार ने नहीं किया. एग्रीमेंट में यह साफ है कि यदि बंगाल सरकार एग्रीमेंट का अनुपालन नहीं करती है, तो डैम के अॉर्बीट्रेटर सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे. एग्रीमेंट हुए 40 साल बीत गये. बंगाल सरकार न तो दो डैम बनायी न बिजली दे रही है और न पानी. इसलिए केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और झारखंड की जनता को न्याय दिलाये. झारखंड में सिंचाई के साधन नहीं

सांसद डॉ निशिकांत ने लोकसभा में कहा : मैं जिस राज्य झारखंड से आता हूं, किसानों की हालत बेहद खराब है. यहां केवल आठ प्रतिशत सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं. कांग्रेस की सरकार ने 1951-52 में तीन डैम बनाये. उसमें से एक मसानजोर है. जो मेरे इलाके में है.

जो नदी मयूराक्षी है वह मेरे लोकसभा देवघर से निकलती है. अभी का मसला वही है. झारखंड की कैबिनेट मंत्री लोइस मरांडी धरने पर बैठी हुई हैं. कल से लगातार आंदोलन चल रहा है. ये जो मसानजोर, पंचेत और मैथन डैम बना, तीनों झारखंड की जमीन पर बना. इसमें तय हुआ था कि संताल परगना के रानीश्वर प्रखंड को पानी दिया जायेगा. उसके बाद 1978 में इसका एक रिवीजिट हुआ. उस वक्त के तत्कालीन सीएम कर्पूरी ठाकुर जी और बंगाल के सीएम ज्योति बसु जी ने 19 जुलाई 1978 को एग्रीमेंट साइन किया. इसमें तय हुआ कि इन डैम के बदले बंगाल सरकार को दो डैम बनाना है- एक नून डैम और कालीपहाड़ी डैम. 40 साल में आज तक वह डैम नहीं बना. डैम हमारी जमीन पर है, जो गेट लगा है हमारा है.

उस डैम पर बंगाल सरकार ने कब्जा कर लिया है. दूसरा जो डैम का गेट है उस पर भी बंगाल सरकार ने कब्जा कर लिया है. वीरभूम के डीसी-एसपी जाते हैं और हमसे लड़ने को तैयार हैं. मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि 1978 में जो एग्रीमेंट हुआ था. वह एग्रीमेंट यह कहता है कि यदि अर्बीट्रेटर जो स्टैंडिंग सुप्रीम कोर्ट का जज होगा, यदि यह एग्रीमेंट लागू नहीं होगा. इसलिए भारत सरकार से आग्रह है कि हम लोगों को न्याय दिलाइये. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, जिनको प्रधानमंत्री बनने की इच्छा है वो झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का जो काम मुख्यमंत्री जी कर रही हैं, उसमें भारत सरकार हस्तक्षेप करे और हम लोगों को न्याय दिलाये.”

बवाल के बीच वीरभूम के एडीएम पहुंचे दुमका, नहीं हुई डीसी से मुलाकात

दुमका. मसानजोर डैम प्रकरण में पश्चिम बंगाल के दो अधिकारी दुमका समाहरणालय पहुंचे. यहां उन्हे जिले के उपायुक्त मुकेश कुमार के साथ मसानजोर विवाद तथा हाल में उत्पन्न विषयों पर बैठक करना था.

लेकिन यहां उन्हें पता चला कि डीसी बासुकिनाथ में श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी का प्रबंधन देख रहे हैं. जानकारी पाकर दोनों अधिकारी बिना बैठक किये बैरंग वापस हो गये. मिली जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के एडीएम रंजन कुमार झा और मयुराक्षी सिंचाई परियोजना के कार्यपालक अभियंता किंशुक मंडल दुमका डीसी के साथ वार्तालाप के लिए पहुंचे थे. मुद्दा था मसानज़ोर डैम को लेकर चल रहा लोगो विवाद तथा रंग-रोगन का बंद कराया जाना. यहां के डैम के समीप झारखंड की सड़क पर बंगाल सरकार ने गेट बनवा दिया है, जिस पर वेस्ट बंगाल लिखे जाने व वहां का लोगो लगवाये जाने पर बवाल मचा हुआ है. डैम पर हो रहे कलर को लेकर भी बहस जारी है.

बंगाल के दोनों अधिकारी लगभग आधे घंटे से अधिक समाहरणालय में बैठे रहे. वीरभूम के एडीएम रंजन कुमार झा ने बताया कि वे अपने डीएम के निर्देश पर मसानजोर डैम में हो रहे विवाद पर चर्चा के लिए आये थे. जब उनसे इस विवाद पर उनका पक्ष पूछ गया तो उन्होंने किसी भी तरह का जवाब देने या टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.दुमका के उपायुक्त के कार्यालय के बाहर बैठे पश्चिम बंगाल से आये पदाधिकारी.

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