भूमि अधिग्रहण का विरोध नहीं हंगामे की बजाय बहस की जरूरत
Updated at : 16 Jul 2018 7:43 AM (IST)
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देवघर : राज्य का विकास अहम नहीं, बल्कि विकास का पैमाना तय करना महत्वपूर्ण है. पांच साल में क्या करना है, सरकार के पास इसकी कोई ठोस नीति नहीं है. हर दिन नयी-नयी घोषणाओं से जनता दिग्भ्रमित है. घोषणाओं के बजाय सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देनी चाहिए. उपरोक्त बातें देवघर पहुंचे आजसू […]
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देवघर : राज्य का विकास अहम नहीं, बल्कि विकास का पैमाना तय करना महत्वपूर्ण है. पांच साल में क्या करना है, सरकार के पास इसकी कोई ठोस नीति नहीं है. हर दिन नयी-नयी घोषणाओं से जनता दिग्भ्रमित है. घोषणाओं के बजाय सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देनी चाहिए. उपरोक्त बातें देवघर पहुंचे आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने बाबा मंदिर में पूजा अर्जना के बाद कही. उन्होंने कहा कि सरकार काम करे व जनता को इसका एहसास दिलाये, तभी लोग जान सकेंगे कि यह सफल सरकार है.
योजनाओं के क्रियान्वयन का रोड मैप नहीं होने के कारण ही परेशानी हो रही है. सुदेश महतो ने कहा कि देश में कई राज्य अब भी बीमारू अवस्था में हैं. उस श्रेणी में अभी हमलोग भी शामिल हैं. कहा कि जिसकी भी सरकार होगी, काम करना होगा. वर्तमान में जो योजनाएं चल रही है, उसे लागू करने के लिए सरकार के पास हैंड नहीं हैं. आज किसी भी गांव में जाकर प्रमुख योजना के बारे में ग्रामीण से पूछिये तो वे नहीं बता सकेंगे. योजनाएं तो हर राज्य में चलती है. केंद्र से हम क्या विशेष ला पाते हैं वह महत्वपूर्ण है. हमारे हिस्से के गंगा का पानी भी हमें नहीं मिलता. हमारे यहां चेक डैम है पर सिंचाई का लाभ बंगाल को मिल रहा है.
हमारे हिस्से में डूब क्षेत्र है. सुदेश महतो ने कहा कि कोल ब्लॉक से हमें पहले रॉयल्टी पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब राज्य को हिस्सा मिलना बेहतर संकेत है. अन्य खनिज जैसे आयरन, तांबा लोहा आदि पर भी हमारी हिस्सेदारी तय हो. इस अवसर पर विधायक कमल किशोर भगत, जिलाध्यक्ष ध्रुव प्रसाद साह, पूर्व डीआइजी सुबोध प्रसाद, महेश राय, रवि राउत, सोना सिन्हा, राजा सहानी आदि कार्यकर्ता मौजूद थे.
भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष पर भी निशाना
सुदेश महतो ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल सदन में तीन मिनट में पास हो जाता है. विपक्ष एक बार भी विरोध नहीं करता है. रोड पर नाटक कर लोगों को केवल भ्रमित करने का काम कर रही है. यह पूरी तरह से गलत है. सब जानते हैं. जो होना है, वह सदन में ही होगा. उन्होंने कहा कि पार्टी का बिल पर विरोध नहीं है. लेकिन, कुछ मुद्दों से असहमत है. इस पर बहस की जरूरत है. सत्र में इस पर चर्चा करें. विपक्ष भी अपनी बातों को रखें. सुखाड़ के लिए जैसे सदन की कार्यवाही बढ़ती है. वैसे यह मुद्दा भी लोगों के जीवन का सवाल है. जल-जंगल-पानी तीनों जरूरी है. इस पर बात होनी चाहिए.
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