फूहड़ गीतों से भोजपुरी का भला नहीं

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देवघर : भोजपुरी के जो गीत बाजार में आ रहे हैं, दरअसल वो लोकगीत हैं ही नहीं. वैसे गायकों से अपील है कि वे बिहार की माटी की गरिमा को समझें अौर अर्थपूर्ण शब्दों वाले गीतों को पेश करें. वरना, पूरी दुनिया में भोजपुरी फिल्म, गीत अौर बिहारियों का असम्मान होता रहेगा. ये बातें भोजपुरी […]

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देवघर : भोजपुरी के जो गीत बाजार में आ रहे हैं, दरअसल वो लोकगीत हैं ही नहीं. वैसे गायकों से अपील है कि वे बिहार की माटी की गरिमा को समझें अौर अर्थपूर्ण शब्दों वाले गीतों को पेश करें. वरना, पूरी दुनिया में भोजपुरी फिल्म, गीत अौर बिहारियों का असम्मान होता रहेगा.

ये बातें भोजपुरी के उभरते सितारे भवानी पांडेय ने कही. महुआ व स्टार प्लस चैनल में अपनी प्रस्तुति से भोजपुरी गायकी में प्रसिद्धि पाने वाले भवानी पांडेय बिहार के जमुई जिला के रहनेवाले हैं. उन्होंने कहा कि भोजपुरी के साथ-साथ बिहार में बोली जाने वाली मगही, अंगिका, मैथिली, बज्जिका आदि की भी अपनी पहचान है. इस वजह से फूहड़ गीत पेश करने वाले कलाकारों को बिहार की अस्मिता व संस्कृति को बचाने की दिशा में काम करनी चाहिए. यहां के कलाकार अपनी लोक गीत व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. प्रोड्यूसर व वितरकों को भी अच्छे गीतों को बाजार में बेचने की कोशिश करनी चाहिए. लोगों की डिमांड है कि अच्छे निर्देशक व अच्छे गीतकार आगे आयें व अच्छे गीत पेश करें. लोग उन्हें सहर्ष स्वीकार करेंगे. आज सभी राज्यों की अपनी लोक संस्कृति व गीत है.

जिसे आसानी से यू-ट्यूब व गूगल पर सर्च कर सुन सकते हैं. भोजपुरी के अलावा मगही, अंगिका, मैथिली, बज्जिका के भी एक से बढ़कर एक गीत व कलाकार हैं. इसी वजह से मुंबई के प्रोड्यूसर आज भोजपुरी के पॉप मॉडर्न के फ्यूजन की डिमांड करते हैं. भोजपुरी फिल्मों का मुकाबला अच्छाई से नहीं बल्कि बुराई से है. 20-25 फीसदी अच्छे गीतों व फिल्मों को पसंद कर रहे हैं, कोशिश 50 फीसदी की है.चैनल वाले अश्लीलता परोसना बंद करें, ताकि अपनी भाषा से लोगों को शर्मिंदगी न उठानी पड़े, बल्कि मातृभाषा के प्रति सम्मान का भाव जगे.

भवानी एक परिचय

मैट्रिक की पढ़ाई : वर्ष 2005 में जमुई हाइस्कूल से , वर्ष 2011में केकेएम कॉलेज, जमुई से अग्रेंजी(सम्मान) में, म्यूजिक से एमए करने के बाद कोलकाता में पं. राजा बोस से गायकी सीखी, संगीत की शिक्षा : घर में दादा शिवनंद पांडेय से भजन-कीर्तन गाते हुए राज्य युवा महोत्सव : वर्ष 2008 में विजेता मुंगेर में आइडॉल कंपटीशन : वर्ष 2010 में विजेता बने दो वर्षों तक कोलकाता में संगीत की पारंपरिक शिक्षा लेने के बाद वर्ष 2013 में महुआ चैनल के सुरसंग्राम में शिरकत की. हाइस्कूल में संगीत शिक्षक के रुप में वर्ष 2016 में नौकरी लगी. उसे छोड़ कर वर्ष 2016-17 में स्टार प्लस के रियलिटी शो -दिल है हिंदुस्तानी कार्यक्रम में यूपी, बिहार व झारखंड का प्रतिनिधित्व किया.

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