नौ करोड़ खर्च, फिर भी पांच साल से पानी का इंतजार

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सारठ: वित्तीय वर्ष 2011-12 मे राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से सारठ व पालोजोरी के विभिन्न गांवो मे 36 पेयजलापूर्ति योजना की स्वीकृति दी गयी थी. हर योजना की लागत तकरीबन 25 लाख थी. लेकिन शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां लोगों को पेयलापूर्ति की गयी […]

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सारठ: वित्तीय वर्ष 2011-12 मे राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से सारठ व पालोजोरी के विभिन्न गांवो मे 36 पेयजलापूर्ति योजना की स्वीकृति दी गयी थी. हर योजना की लागत तकरीबन 25 लाख थी. लेकिन शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां लोगों को पेयलापूर्ति की गयी हो. आरोप है कि कई योजनाओं को बिना पूरा किये ही कई संवेदकों को अंतिम भुगतान कर दिया गया.

पानी तो मिला नहीं, हो गया भुगतान : विभाग ने इसके लिये निविदा के माध्यम से संवेदक नियुक्त किया था. नियमानुसार योजना को पूरा कर घरों में कनेक्शन दे कर फोटोग्राफ के साथ जियो टैगिंग किया जाना था. उसके बाद संवेदक को एक वर्ष तक योजना कोे चला कर ग्रामीणों के बीच ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को सौंप देना था. जिसके के बाद योजना संचालन का जिम्मेवारी ग्रामीणों की होती. लेकिन, यहां योजना को बिना पूर्ण कराये ही कइयों को अंतिम भुगतान कर दिया गया. गांवों के लोग आज भी पेयजलापूर्ति का इंतजार कर रहे हैं.

करीब नौ करोड़ हो गये खर्च, कहीं नहीं पहुंचा पानी : ग्रामीणों ने कई बाद शिकायत की लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं की गयी. सारठ व पालोजोरी के 36 योजनाओं पर विभाग के लगभग नौ करोड़ रुपये खर्च हो गये. सारठ व पालोजोरी प्रखंड के एक-दो गांवों में कागज पर योजना को चालू दिखाया गया है. लेकिन, धरातल पर हाल कुछ और ही है. तकरीबन हर योजना योजना में गड़बड़ी है. कहीं मोटर तो कहीं सोलर प्लेट उखड़ गया है या गायब हो गया है. इस कारण कारण योजना बंद पड़ी है.

अपूर्ण योजना ग्रामीणो‍ं को सुपुर्द करने का बन रहा दबाव : दिशा की बैठक में अध्यक्ष सह सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में अधिकारियों को फटकार लगायी थी. आरोप है कि फटकार मिलने के बाद विभाग के अधिकारी कई गांवों में जाकर ग्रामीणों व मुखिया के साथ बैठक कर योजना को हैंडओवर करने को कहा. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पहले योजना को चालू करें, उसके बाद हैंडओवर करें.

सारठ व पालोजोरी के इन गांवों में बनी थी जलमीनारें
सारठ के पलमा, लकड़ाखोंदा, डीडांकोली, बसाहाटांड़, सधरिया, बारा, कैराबांक, ढोडोडुमर, बगजोरिया, जमुवासोल, नगड़ो, बीरजामुन, बामनडीहा, कुशबेरिया, शिमला, बीरमाटी, मझलाडीह व बहादुरपुर में जलमीनारें बनी थीं. पालोजोरी के बाराडुब्बा, दासियोडीह, बीराजपुर, पालाजोरी, बेदगावा नावाडीह, चलबली, कशरायडीह, पाडो, कुशुमडीह, जरमुंडी, शिमला, गोपालपुर, कुंजोडा, ब्रह्मशोली, नावाडीह, सरसा, लखनपुर व सगराजोर में जलमीनारें बनी थीं.

कहते हैं कार्यपालक अभियंता
कार्यपालक अभियंता प्रदीप कुमार चौधरी ने कहा कि जो योजनाएं बंद पड़ी हैं, उनका प्राक्कलन बना कर विभाग को भेजा गया है. कई योजना अभी पूर्ण भी नहीं हुई है, जो उसकी मरम्मत की जाये. योजनाएं चालू हों इसके लिए विभाग प्रयास कर रहा है.

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