संताली व खोरठा को बढ़ावा देने के लिए अनुवाद जरूरी
देवघर : साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली व रमा देवी बाजला महिला कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘पूर्व एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्रों का लोक साहित्य : निरंतरता, विभिन्नताएं एवं विलय’ विषय पर परिसंवाद का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के कुलपति डॉ मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने किया. स्वागत भाषण एवं आरंभिक […]
कार्यक्रम का उदघाटन सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के कुलपति डॉ मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने किया. स्वागत भाषण एवं आरंभिक वक्तव्य अंगरेजी की विभागाध्यक्ष सह साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली की अंगरेजी परामर्श मंडल की सदस्य डॉ रीता राय ने दिया. कुलपति ने कहा कि संताल परगना में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. उन्हें ठीक प्रकार से उभारने की जरूरत है. क्षेत्रीय लोक साहित्य संताली, खोरठा आदि को भी उभारा जाना चाहिए. इसका विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए. तभी क्षेत्रीय लोक साहित्य को बेहतर तरीके से बढ़ावा मिल सकेगा.
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