लेट-लतीफी के कारण खाली जाती हैं मेला स्पेशल ट्रेनें

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उपेक्षा . टैक्स तो लेता है पर सुविधा नहीं देता रेलवे देवघर : रेलवे हर साल बाबाधाम आने-जाने वाले यात्रियों को व शिव भक्तों को सुविधा देने का वादा करती है. हर साल श्रावणी मेले के दौरान एक माह तक रेलवे यहां से यात्रा करने वाले यात्रियों से प्रति टिकट 10 रुपये मेला टैक्स के […]

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उपेक्षा . टैक्स तो लेता है पर सुविधा नहीं देता रेलवे

देवघर : रेलवे हर साल बाबाधाम आने-जाने वाले यात्रियों को व शिव भक्तों को सुविधा देने का वादा करती है. हर साल श्रावणी मेले के दौरान एक माह तक रेलवे यहां से यात्रा करने वाले यात्रियों से प्रति टिकट 10 रुपये मेला टैक्स के रूप में वसूल करती है. लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ विशेष नहीं करती. मेले में पिछले 15 दिनों में सिर्फ जसीडीह स्टेशन से रेलवे को 5.24 करोड़ की आय हुई है. पिछले साल के 15 दिनों की आय की तुलना में इस बार 17.19% का इजाफा हुआ है. अब तक 556862 यात्रियों ने टिकट लिया है. पिछले वर्ष 15 दिनों की तुलना में इस बार यात्रियों की संख्या में भी 14.83% बढ़ोतरी हुई है. सुविधाएं जो रेलवे पिछले पांच वर्षों से देती आयी है, वही है. कुछ नया नहीं दिया गया है.

भेड़-बकरी की तरह यात्रा करते हैं श्रद्धालु : रेलवे ने सुविधा के लिए दस ट्रेनों का परिचालन मेला स्पेशल के रूप में किया जरूर है लेकिन ये ट्रेनें इतने विलंब से चलती है कि इसका लाभ श्रद्धालु नहीं उठा पा रहे हैं. हद तो यह है कि प्राय: सभी मेला स्पेशल ट्रेनें पांच से छह घंटे विलंब से चल रही है. इस कारण इस रूट से सभी ट्रेनों में भेड़-बकरी की तरह श्रद्धालु यात्रा करते हैं. जान को जोखिम में डालकर यात्री ट्रेन की यात्रा कर रहे हैं. लेकिन रेलवे को सिर्फ मेला टैक्स से मतलब रहता है.

किराया मेल/एक्सप्रेस का, चलती है पैसेंजर की तरह : ने मेला स्पेशल 10 ट्रेनों का परिचालन किया. लेकिन ये ट्रेनें पांच से छह घंटे विलंब से चलती है. इन ट्रेनों में किराया मेल/एक्स का लगता है लेकिन पैसेंजर की तरह चलती है. इस कारण ट्रेनें खाली जाती-आती है. मेला स्पेशल ट्रेनों में जसीडीह-जयनगर एक्सप्रेस(5 दिन)-टाटानगर मेल/एक्सप्रेस(05 दिन), जसीडीह-गया एक्सप्रेस(5 दिन), जसीडीह-पटना एक्सप्रेस(प्रतिदिन), आसनसोल-पटना मेल/एक्सप्रेस(रवि व सोम), आसनसोल-पटना मेल/एक्सप्रेस(शनिवार-साप्ताहिक), जसीडीह-रक्सौल एक्सप्रेस(मंगलवार), जसीडीह-गोरखपुर मेल/एक्स(5 दिन), जसीडीह-जमालपुर(सप्ताह में छह दिन) चल रही है. इसके अलावा चार फेरा जसीडीह-बैद्यनाथधाम के बीच चल रही है.

बासुकिनाथ के लिए एक भी ट्रेन नहीं चलायी

रेलवे तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए कितना गंभीर है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जसीडीह या देवघर से बासुकिनाथ के लिए एक भी ट्रेन अतिरिक्त नहीं चलायी. जबकि बाबाधाम अाने वाले लगभग श्रद्धालु बासुकिनाथ भी जाते हैं. यह संख्या एक महीने में 30 लाख से भी अधिक होती है. रेलवे को इस रूट में डीएमयू ट्रेन भी चलाना चाहिए था या जो ट्रेन चल रही है उसका फेरा बढाना चाहिए था. रविवार को तो सिर्फ इंटरसिटी ही चलती है, उस दिन बासुकिनाथ के लिए कोई ट्रेन नहीं चलती. रेलवे ने हर साल की तरह इस बार भी जसीडीह से बैद्यनाथधाम के लिए ही सिर्फ ट्रेनों का फेरा बढ़ाया.

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