जान की परवाह किये बगैर बस आते ही दौड़ पड़ते हैं कांवरिये

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परेशानी. श्रावणी मेले में वाहनों का प्रायोजित संकट देवघर : श्रावणी मेला-2017 बदहाल यातायात व्यवस्था के लिए याद रखा जायेगा. वाहनों की कमी के कारण दूर-दराज से देवघर पहुंचने वाले श्रद्धालु व कांवरिये बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण के बाद घंटों सड़क पर खड़े होकर बस व टैंपो की बाट जोहते नजर आ रहे हैं. […]

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परेशानी. श्रावणी मेले में वाहनों का प्रायोजित संकट

देवघर : श्रावणी मेला-2017 बदहाल यातायात व्यवस्था के लिए याद रखा जायेगा. वाहनों की कमी के कारण दूर-दराज से देवघर पहुंचने वाले श्रद्धालु व कांवरिये बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण के बाद घंटों सड़क पर खड़े होकर बस व टैंपो की बाट जोहते नजर आ रहे हैं. बाध्य होकर कांवरियों को पिछले दो दिनों में सड़क जाम करने पर आमदा होना पड़ा. इसके बावजूद यातायात व्यवस्था को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए जिम्मेवार अफसर व कर्मी बेबस नजर आ रहे हैं. उनकी कोई सुनता ही नहीं. एक महिला पदाधिकारी अकेले आधा दर्जन पुलिस कर्मियों के सहयोग से सुबह-शाम फब्बारा चौक से लेकर पानी टंकी,
मंदिर मोड़ व झौंसागढ़ी तक वाहनों को कतारबद्ध करने में व्यस्त नजर आ रही है. जबकि ट्रैफिक व्यवस्था को बहाल रखने के लिए जिम्मेवार वरीय पदाधिकारी वाहनों को कतारबद्ध करने या वन-वे व्यवस्था को कायम रखने में कम, सड़क के किनारे खड़े होकर व्यवस्था के ठीक होने का इंतजार करना ज्यादा पसंद करते हैं. नतीजा बस स्टैंड से लेकर पानी टंकी, मंदिर मोड़ व झौंसागढ़ी काली मंदिर के समीप कांवरियों की भारी भीड़ सड़कों पर नजर आ रही है. इसके कारण आम लोगों का सड़कों पर चलना दूभर हो गया है. सबसे ज्यादा परेशानी कामकाजी लोगों व स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है. वे घंटो जाम में फंसे रह कर आवागमन बहाल होने का इंतजार करते हैं. मगर नीचे वाले कुछ करने से परहेज कर रहे हैं. कुछ इसी तरह की व्यवस्था जरमुंडी में भी है. वहां से लौटने के बाद कांवरिया बंधु समस्या को देखने के बाद आगे से कांवर पर न आने की बात कहने को मजूर हो रहे हैं.
बासुकिनाथ के लिए रेल भी है विकल्प
देवघर पहुंचने वाले अधिकाश कांवरिये अाज भी जानकारी के अभाव में सड़क मार्ग से ही जरमुंडी स्थित बासुकिनाथ तक की यात्रा करना सहज समझते हैं. जबकि बीते चार-पांच वर्षों से देवघर से दुमका व जसीडीह से बासुकिनाथ तक जाने के लिए रेल मार्ग का भी विकल्प मौजूद है. जो दिन में छह-सात फेरा वाया देवघर, जसीडीह से होते हुए बासुकिनाथ अौर दुमका स्टेशन तक लगाती है. जो सुरक्षित व कम खर्च वाला सफर होगा.
टैंपो वाले150 व बस वाले 60 रु ले रहे किराया
वाहनों की कमी के कारण कांवरिया सड़क पर जो सामने अॉटो व बस नजर आती है. उस पर येन-केन प्रकारेण सवार हो जाना चाहते हैं. कांवरियों की इस मजबूरी का फायदा अॉटो, टैंपो व मैजिक अौर बस वाले जमकर उठा रहे हैं.
बासुकिनाथ के लिए अॉटो व मैजिक वाले एक कांवरिया से 150-180 रुपये तक वसूल रहे हैं. जबकि बस वाले सामान्य दिनों के मुकाबले 40 की जगह 50-60 रुपये तक वसूल रहे हैं.
जान जोखिम में डाल यात्रा को विवश
वहीं दूसरी अोर सैकड़ों ऐसे कांवरिया भी हैं. जो बस व अॉटो का किराया बचाने के लिए बाध्य होकर रिमझिम फुहारों के बीच बस अौर मैजिक की छत पर सवार होकर यात्रा करने को विवश हो रहे हैं. इसके कारण कांवरिया सड़क दुर्घटना का भी शिकार हो रहे हैं. जबकि प्रशासन की अोर से इस पर रोकथाम के लिए सिर्फ खानापूर्ति हो रही है.
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