बोकारो: कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी दो दिन होने के कारण चार दिवसीय छठ आयोजन को लेकर छठव्रतियों में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. दीवाली से छह दिन बाद छठ पूजा करने की परंपरा होने के कारण ही यह स्थिति बनी है. श्री राम मंदिर के मुख्य पुजारी शिव कुमार शास्त्री ने कहा […]
बोकारो: कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी दो दिन होने के कारण चार दिवसीय छठ आयोजन को लेकर छठव्रतियों में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. दीवाली से छह दिन बाद छठ पूजा करने की परंपरा होने के कारण ही यह स्थिति बनी है. श्री राम मंदिर के मुख्य पुजारी शिव कुमार शास्त्री ने कहा कि उंगलियों पर दिन गिन कर छठ पूजा करना अशुभ होगा. शास्त्रों के अनुसार चार दिवसीय महाछठ का नहाय-खाय शुक्रवार से शुरू होगा. उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य सोमवार की सुबह देकर इसका समापन होगा.
शास्त्र के िवपरीत पूजा करना अशुभ : पुजारी श्री शास्त्री ने कहा कि शास्त्र के विपरीत छठ पूजा करना अशुभ होता है. इस समय शास्त्र के विपरीत छठ को लेकर जो दिन व तिथि को लेकर भुलभुलैया है, वह उचित नहीं है. जिस प्रकार शास्त्र के अनुरुप पूरी विधि विधान से छठ की पावन पूजा होती है, उसी प्रकार होनी चाहिए.
उन्होनें कहा कि इन दिनों उंगलियों पर गिनकर छठ मनाने को लेकर छठव्रतियों में संशय की स्थिति बन गयी है. कुछ व्रती गलत आकलन कर रहे हैं. कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से छठ पूजा होती है, इस कारण चार नवंबर से कदू भात(नहाय- खाय) के साथ ही पूजा शुरू होगी.
इस बार तीन व चार नवंबर को चतुर्थी (गुरुवार और शुक्रवार) और चार व पांच नवंबर (शुक्रवार और शनिवार) को पंचमी हो जाने के कारण जो लोग उगलियों में गणना के अनुसार छठ को मान कर चल रहे है वह गलत है. उन्होनें कहा कि चूंकि तीन नवंबर दोपहर 12 बजे के बाद से चतुर्थी प्रारम्भ होगी, जो कि शुक्रवार तक रहेगी. उन्होनें कहा कि चतुर्थी के दिन सूर्य उदय के बाद नहा खाय पर्व प्रारम्भ होता है. इस कारण इस वर्ष भी छठ का नहाय खाय शुक्रवार (चार नवंबर) को माना जायेगा. इसी आधार पर शनिवार को पंचमी का आकलन हो रहा है.
यह आकलन शास्त्र के अनुरुप और शुभ है. उन्होनें कहा कि शनिवार को पंचमी होगा तथा उसी दिन लोहंडा व खरना मनाया जायेगा. रविवार को षष्टी होगी. उस दिन अस्तगामी सूर्य को पहला अर्घ्य छठव्रती देंगे. इस दिन सूर्य का उदय सुबह 06:37 बजे होगा तथा सूर्य का अस्त संध्या 17:32 बजे होगा. यानी छठ घाटों पर व्रती 17:32 बजे के बाद अर्घ्य देना शुरू कर सकते हैं.
व्रतियों को कर रहे जागरूक : उन्होंने कहा कि सात नवंबर (सोमवार) को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इसका समापन होगा. सूर्य का उदय 06:38 बजे तथा सूर्य का अस्त 17:32 बजे होगा. छठव्रती सुबह 06:38 बजे के बाद अर्घ्य देना शुरू करेंगे. उन्होनें कहा कि इसको लेकर उनकी ओर से छठव्रतियों को जागरुक करने का कार्य किया जा रहा है.