यहां टेंट को कहते हैं पीएम आवास

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पीएम आवास :बेघरों को घर देने का दावा जयताड़ा में आकर तोड़ रहा दम सरकारी योजनाओं की सफलता सिर्फ इस पर निर्भर नहीं करती कि शासन तंत्र कितना संवेदनशील व जिम्मेवार है और राजनीतिक इच्छा शक्ति कैसी है, बल्कि सफलता इससे तय होती है कि योजना के कार्यान्वयन लिए तंत्र कितना सक्षम है. इस दृष्टि […]

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पीएम आवास :बेघरों को घर देने का दावा जयताड़ा में आकर तोड़ रहा दम

सरकारी योजनाओं की सफलता सिर्फ इस पर निर्भर नहीं करती कि शासन तंत्र कितना संवेदनशील व जिम्मेवार है और राजनीतिक इच्छा शक्ति कैसी है, बल्कि सफलता इससे तय होती है कि योजना के कार्यान्वयन लिए तंत्र कितना सक्षम है. इस दृष्टि से गरीबों के लिए जयताड़ा के पीएम आवास रोचक केस स्टडी हैं. भुगतान तंत्र अनुकूल न होने के कारण यहां यह हास्यास्पद हो गया है.

चास : कहने को तो है यह प्रधानमंत्री आवास! दिल्ली का प्रधान मंत्री आवास नहीं, योजना के तहत बने गरीबों बेघरों के आवास. अच्छे घर की तमन्ना लिये अपने घर तोड़ डाले इन ग्रामीणों को अब अधूरे निर्माण के कारण टेंट में रहना पड़ता है.

यह सच है चास प्रखंड की पोखन्ना पंचायत स्थित जयताड़ा का. यहां तक आकर बेघरों को घर देने का दावा दम तोड़ रहा है. यहां पीएम आवास योजना के दर्जनों लाभुक हैं, पर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आवास का निर्माण कार्य अभी तक अधूरा है.

मुखिया समेत प्रखंड को है जानकारी : वर्ष 2016-17 के योजना में शामिल लाभुकों को प्राप्त फंड के अनुसार ही निर्माण हो पाया. लिंटर तक काम हो पाया. तीसरा पेमेंट नहीं मिलने के कारण छत नहीं ढल पायी. मजबूर ग्रामीण अधूरे आवासों में ही रहने को विवश हैं. लाभुकों ने कई बार मुखिया समेत प्रखंड कार्यालय को जानकारी दी, पर कोई लाभ नहीं हुआ. ग्रामीणों ने अपना कच्चा मकान तोड़कर पीएम आवास के लिए जमीन उपलब्ध करायी थी.

मेहमान के आने पर होती है परेशानी

जयताड़ा निवासी लाभुक परीक्षित बाउरी की पत्नी इला देवी की परेशानी है कि उन्हें पीएम आवास का लाभ तो मिला, पर निर्माण पूरा नहीं होने से भारी कठिनाई होती है. मेहमानों के आने पर उन्हें बैठाना तक मुश्किल होता है. परिवार के सदस्य तो किसी तरह अधूरे घर में ही टेंट में रह रहे हैं. तेज हवा व बरसात को यहां रोक पाना मुश्किल होता है. पुत्र-पुत्री की शादी करनी है. एक छप्पर का घर है. मेहमान कैसे रहेंगे. कहा कि अगर सरकार जल्द ही पेमेंट कर दे तो आवास पूरा हो जायेगा.

पुत्री के घर में रहती है मालती

70 वर्षीया मालती देव्या के पास जमीन नहीं है. जिस जमीन पर झोपड़ी थी, वहां पीएम आवास बनवा रहे हैं. एक वर्ष बीत गये, पर अभी तक घर पूरा नहीं हो पाया. पुत्री के घर में रहना पड़ता है. वह बोकारो के सेक्टर चार स्थित झोपड़ी कॉलोनी में रहती है. आवास कब पूरा होगा, अगली किस्त कब मिलेगी, इसकी जानकारी कोई नहीं देता है. सिर्फ कहते हैं कि जल्दी मिल जायेगा.

पंचायत क्षेत्र में कई लोगों का पीएम आवास निर्माण फंड के अभाव में रुका हुआ है. इस संबंध में सामूहिक पत्र लिखकर चास बीडीओ से अगली राशि की मांग की गयी है. फंड उपलब्ध होते ही राशि निर्गत कर दी जायेगी.

सरस्वती बनर्जी, मुखिया, पोखन्ना पंचायत, चास प्रखंड

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