खुले में बिकता है सामान, नहीं पड़ती है फूड सेफ्टी विभाग की नजर

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किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है विभाग बोकारो : बोकारो के गली, मुहल्ले या चौराहे पर खाने-पीने के सामान बेचने वाले दर्जनों दुकानें चल रहीं हैं. ऐसी दुकानों में खुले में रख कर खाद्य सामग्री बेची जा रही है. इनमें से किसी के पास भी फूड लाइसेंस नहीं है. कौन-क्या बेच रहा है. […]

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किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है विभाग

बोकारो : बोकारो के गली, मुहल्ले या चौराहे पर खाने-पीने के सामान बेचने वाले दर्जनों दुकानें चल रहीं हैं. ऐसी दुकानों में खुले में रख कर खाद्य सामग्री बेची जा रही है. इनमें से किसी के पास भी फूड लाइसेंस नहीं है. कौन-क्या बेच रहा है. खाद्य सामग्री की गुणवत्ता क्या है, फूड व सेफ्टी के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं. खाने से लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ रहा है. इसकी जानकारी तक फूड एंड सेफ्टी विभाग नहीं ले रहा है. विभाग की नजर भी ऐसे दुकानों पर नहीं पड़ती है.
जब भी कोई बड़ा मामला सामने आता है, फूड व सेफ्टी विभाग सक्रिय हो हो उठता है. शहर में चलने वाले मेस के साथ-साथ ठेले व खोमचे पर खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों का निबंधन का कोई ठोस आंकड़ा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है.
खाना आधा कच्चा-पक्का व साफ सुथरा नहीं होने पर परेशानी होती है. इससे पेट दर्द, वोमेटिंग, लूज मोसन, बेचैनी, बुखार आदि की समस्या हो जाती है. सामान्य फूड प्वाइजनिंग में अधिक परेशानी नहीं होती है. यदि यह समस्या गंभीर हो, तो जान तक जा सकती है. विद्यार्थी जहां-तहां का खाना व पानी प्रयोग नहीं करें. यह स्वास्थ्य के लिए घातक होता है.
डॉ रणधीर सिंह, चिकित्सक, झारखंड सरकार
क्या कहते हैं आम लोग
फूड सेफ्टी विभाग को स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होना चाहिए. आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं की जानी चाहिए.
दीप शिखा, सेक्टर नौ
बिना फूड लाइसेंस के कारोबार का अर्थ लोगों के सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है. प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करे.
राकेश प्रसाद, सेक्टर पांच
खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक खाद्य सामग्री का कारोबार करने वालों को फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य है. बिना निबंधन के संस्थान चलाने पर 25 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है. बड़े खाद्य संस्थान यदि बिना निबंधन के चल रहे हैं, तो 25 हजार जुर्माना के साथ-साथ छह माह कारावास की भी सजा है. स्वास्थ्य खराब होता है या किसी की मौत होती है. इसमें अलग-अलग धारा के अनुसार सजा का प्रावधान है.
राजीव मालवीय, अधिवक्ता, बोकारो कोर्ट
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