बोकारो के मुकुल ने बाइक से 85 दिन में पूरा किया 12000 किमी का सफर

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किताब ‘एक्सप्लोरिंग दी हिमालयाज’ को मिले 1000 से अधिक पाठक सुनील तिवारी बोकारो : गुवाहाटी टू बोकारो वाया सेवन सिस्टर्स स्टेट बाइ मोटरसाइकिल… बोकारो के मुकुल मुखर्जी ने मोटरसाइकिल से 85 दिन में 12000 किलोमीटर का सफर पूरा किया है. मुकुल अक्तूबर 2017 में नार्थ ईस्ट का दीदार करने निकला. 07 राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, आसाम, […]

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किताब ‘एक्सप्लोरिंग दी हिमालयाज’ को मिले 1000 से अधिक पाठक
सुनील तिवारी
बोकारो : गुवाहाटी टू बोकारो वाया सेवन सिस्टर्स स्टेट बाइ मोटरसाइकिल… बोकारो के मुकुल मुखर्जी ने मोटरसाइकिल से 85 दिन में 12000 किलोमीटर का सफर पूरा किया है. मुकुल अक्तूबर 2017 में नार्थ ईस्ट का दीदार करने निकला. 07 राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड व सिक्किम) के सफर में 85 दिन का समय लगा. इसमें से 42 दिन अरुणाचल प्रदेश में बिताया. शंघाई फेस्टिवल का आनंद लिया. मेचुका, ट्यूरिंग गेलिंग, अनिनि, दौंग एंड किविथु जैसे दुरुह स्थान का दौरा हुआ. मुकुल मोटरसाइकिल से नॉर्थ ईस्ट इंडिया भ्रमण करने के बाद पुन: गुवाहाटी लौटा. सिलिगुड़ी, बेस्ट बंगाल, भागलपुर, देवघर होते हुए बोकारो पहुंचा. मुकुल सिर्फ बाइक टुअरिंग के शौकीन ही नहीं है, बल्कि सफर को कैमरे में कैद करने की चाहत भी रखते हैं.
इसके लिए मुकुल ने बाकायदा फोटोग्राफी भी सीखी. कैनन कंपनी से ट्रेनिंग ली. इतना ही नहीं वह सफर को कलमबद्ध भी करते हैं. यात्रा वृतांत पर लिखी किताब ‘एक्पलोरिंग दी हिमालयाज’ को पेंग्विन प्रकाशन की बुक हाउस पैट्रीज इंडिया ने प्रकाशित की है. इसको 1000 से ज्यादा पाठक मिले हैं. बाइक टुअरिंग की खासियत यह कि मुकुल अकेले ही सफर करते हैं. बताया : 2006 में परिवार के साथ लद्दाख गये थे. लद्दाख की खूबसूरती ने मन मोह लिया. मन ही मन फैसला हुआ कि यहां दोबारा आना है. लेकिन, सफर की साथी बाइक बनेगी.
2014 में लद्दाख की बाइक टुअरिंग
मुकुल ने बताया : 2014 में लद्दाख की बाइक टुअरिंग हुई. इस यात्रा का वृतांत लिखना शुरू किया, तो कुछ कमी महसूस हुई. कमी फोटो की थी. इस कारण 2016 में फोटोग्राफी सीखने के बाद दोबारा लद्दाख की बाइक टुअरिंग की. इसके बाद जनवरी 2017 में किताब प्रकाशित हुई. मुकुल बताते हैं : लद्दाख की खूबसूरती का कोई जोड़ नहीं है. लेकिन, नॉर्थ ईस्ट इंडिया के बारे में भी बहुत सुना था. इस कारण मोटरसाइकिल से भ्रमण करने को फैसला किया. मुकुल ने लक्ष्य बताते हुए कहा : ‘हिमालय’ पर ही अभी तीन किताब लिखनी है. नेचर एंड वाइल्ड लाइफ की फोटोग्राफी करनी है. मोटरसाइकिल से पूरे देश का भ्रमण करना है. उसके बाद अगर समय बचा तो बिजनेस भी करूंगा.
वो जीवन का हसीन लम्हा था…
मुकुल ने बताया : नॉर्थ ईस्ट के भ्रमण के दौरान आस्ट्रेलियाई विजिटर्स को अपना विजिटिंग कार्ड दिया. विजिटर्स ने कहा : ही इज मुकुल मुखर्जी, एंड आइ स्टडीड हीज बूक्स. नेम्ड ‘एक्पलोरिंग दी हिमालयाज’ हाव यू गीव हीज विजिटिंग कार्ड टू मी? मुकुल ने कहा : आइ एम मुकुल मुखर्जी. बताते हैं : यह जीवन का हसीन लम्हा था. बताया : किताब एमेजन पर उपलब्ध है. विदेशों में इसकी डिमांड अधिक है. बताया : माता-पिता का सहयोग हर कदम पर मिला. चाहे वह आर्थिक सहयोग की बात हो या मानसिक ताकत देने की बात. कहा : अच्छा लगता है जब कोई यह कहता है कि वह तुम ही हो, जिसने बाइक से सेवन सिस्टर्स को देखा है. समाज में एक अलग पहचान मिली है.
नाम : मुकुल मुखर्जी
पिता : मानस मुखर्जी (उषा पेट्रोल पंप)
माता : राजश्री मुखर्जी (सदस्य, लायंस क्लब व बंग भारती)
पता : सेक्टर 04/एफ- 5121, बीएस सिटी
10वीं : चिन्मय विद्यालय-सेक्टर 5
12वीं : पुणे कॉलेज (आईएससी)
इंजीनियरिंग : मेरिट इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स)- तमिलनाडु
एमबीए : कार्डिक मेट्रोपलिटन यूनिविर्सटी- यूके
नौकरी छोड़ा : सॉफ्टवेयर जॉब, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी
फोटोग्राफी : निकॉन से सिखा
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