बीएसएल के अफसर करेंगे दिल्ली कूच
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बोकारो. केंद्र सरकार की कथित गलत नीतियों के चलते वेतन पुनरीक्षण के लाभ से वंचित बोकारो इस्पात संयंत्र समेत सेल के अधिकारी दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं. अधिकारी 12 सितंबर को जंतर-मंतर के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे. अधिकारी थर्ड पे रिविजन कमेटी की अनुशंसित रिर्पोट के नुकसानदेय बदलाव का विरोध करेंगे. वहीं […]
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बोकारो. केंद्र सरकार की कथित गलत नीतियों के चलते वेतन पुनरीक्षण के लाभ से वंचित बोकारो इस्पात संयंत्र समेत सेल के अधिकारी दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं. अधिकारी 12 सितंबर को जंतर-मंतर के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे. अधिकारी थर्ड पे रिविजन कमेटी की अनुशंसित रिर्पोट के नुकसानदेय बदलाव का विरोध करेंगे. वहीं मंगलवार को काम के दौरान अधिकारी काला फीता लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे.
बोकारो स्टील ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ पीके पांडेय ने सोमवार को बताया : सरकार ने अफोर्डिबिलिटी क्लॉज पर बिलकुल विचार नहीं किया है. जबकि, इससे अफसरों को बड़ा नुकसान होने वाला है. इसके तहत पे रिविजन के निर्धारण के लिए तीन साल का पीबीटी (कर पूर्व लाभ) को आधार बनाया गया है. इस दौरान सेल के घाटा में रहने के कारण अधिकारियों को पे रिविजन का लाभ नहीं मिल पायेगा.
डॉ पांडेय ने बताया : थर्ड पे रिविजन की अनुशंसित रिपोर्ट में कैबिनेट के बदलाव से महारत्न कंपनी सेल के अधिकारियों में रोष है. दिल्ली में प्रदर्शन के जरिये अधिकारी अफोर्डिबिलिटी क्लॉज में बदलाव की मांग कर पिछले 10 साल के पीबीटी को बनाने की मांग करेंगे. ग्रेच्युटी मामला में भी सरकार के संशोधन से भी अधिकारियों को नुकसान होगा. बताया : 11 सितंबर को बोकारो से दर्जनों अधिकारी दिल्ली के लिए रवाना होंगे.
अफसरों का तर्क : अधिकारियों का मानना है कि भले ही सेल 2015 से अब तक मंदी के दौर से गुजर रहा है, लेकिन इसका मुख्य कारण संयंत्र का आधुनिकीकरण व विस्तारीकरण पर किया गया खर्च है. सेल अफसरों का पे रिविजन एक जनवरी 2017 से लंबित है. ऐस में इसके मापदंड का निर्धारण 2015 को आधार मानकर नहीं किया जाना चाहिए.
नुकसान और भी : कंपनी आवासों में रहने पर अधिकारियों को पर एक्यूजिट टैक्स लगता है, उसे हटाने की अनुशंसा कमेटी की ओर से की गयी थी. इस मांग को सरकार ने नहीं मानी. साथ ही कमेटी ने पोस्ट रिटायरमेंट बेनीफिट थर्ड पे- रिविजन कमेटी ने 03 प्रतिशत देने की अनुशंसा की थी. इसे सरकार ने घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है.
अफसरों को यहां हो रहा है बड़ा नुकसान : थर्ड पे-रिविजन कमेटी की ओर से ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपया करने का सुझाव दिया गया था. बेसिक व डीए को जोड़कर उसका 30 प्रतिशत सुपरनुवेशन बेनीफीट जारी रखने व 10 लाख रुपया कंपनी को अलग से ग्रेच्युटी के लिए भुगतान करने को कहा था. जिसे डीपीई के आदेश के बाद हटा दिया गया है.
थर्ड पे रिविजन कमेटी ने 35 प्रतिशत बेसिक पे पर देने की अनुशंसा की थी. साथ ही यह भी सुझाव दिया था कि जब डीए 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाये तो 8.75 प्रतिशत पर्क्स बेसिक पे पर बढ़ा दिया जाये. इस अनुशंसा को भी कैबिनेट ने हटा दिया.
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