Bihar: समय से पहले बुजुर्ग दिखने लगे हैं भागलपुर के युवा, जानें क्या है वजह
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Oct 2022 7:15 AM
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल काॅलेज अस्पताल के वरीय चिकित्सक सह श्वांस रोग विशेषज्ञ डाॅ आलोक कुमार कहते हैं कि प्रदूषण की वजह से लोग ज्यादा बीमार हो रहे है. दरअसल, नाक मुंह से धुलकण फेफड़ा में जाता है.
मिहिर, भागलपुर: जिलेवासी तेजी से अपने उम्र के हिसाब से ज्यादा बुजुर्ग दिखने लगे हैं. चिकित्सक इसकी वजह वायु प्रदूषण को मान रहे हैं. यहां रहने वाले लोग हर्ट एवं फेफड़े का रोगी भी इस वजह से ज्यादा हो रहे हैं. दो माह के अंदर एक दर्जन से ज्यादा हेल्थ शिविर के दौरान प्रदूषण की वजह से रोग का शिकार हुए ज्यादा लोग इलाज कराने आये. स्थिति देख चिकित्सक परेशान हैं. मरीज क्लिनिक में भी प्रदूषण का शिकार होकर आ रहे है. एेसे लोगों को मास्क से दोस्ती करने की सलाह चिकित्सक दे रहे है.
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल काॅलेज अस्पताल के वरीय चिकित्सक सह श्वांस रोग विशेषज्ञ डाॅ आलोक कुमार कहते हैं कि प्रदूषण की वजह से लोग ज्यादा बीमार हो रहे है. दरअसल, नाक मुंह से धुलकण फेफड़ा में जाता है. जो फेफड़ा में जमा हो जाता है. इसके बाद यह नस में चला जाता है. इससे खून की रफ्तार कम हो जाती है. हर्ट को जितनी तेजी से खून चाहिए, वह नहीं मिल पाता है. इस वजह से लोग हर्ट रोग का शिकार हो रहे हैं. फेफड़े में धूलकण जमा होने से सांस की बीमारी का शिकार हो रहे है. खून त्वचा में सही से नहीं जा पाता है, इसका असर दिखने लगता है. त्वचा की चमक कम होने लगती है. जिससे लोग ज्यादा उम्र के दिखने लगते हैं.
एयर क्वालिटी इंडेक्स एप से मिली जानकारी के अनुसार भागलपुर में पीएम 2.5 की वर्तमान सांद्रता हवा के प्रति क्यूबिक मीटर में 32 माइक्रोग्राम है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 24 घंटे के लिए पीएम 2.5 की सांद्रता के रूप में हवा में प्रति क्यूबिक मीटर में 15 माइक्रोग्राम की सिफारिश करता है. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि भागलपुर में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब चल रही है.
प्रदूषण का असर आम लोगों पर सीधे पड़ रहा है. स्वस्थ्य इंसान अचानक सांस या हर्ट राेग का शिकार हो जा रहे है. जब परेशानी होती है, तो लोग सरकारी एवं निजी क्लिनिक में इलाज कराते आते है. इनकी जांच की जाती है, तो पता चलता है ये रोग का शिकार हो चुके है. मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी एवं आेपीडी में रोजाना दो दर्जन से ज्यादा लोग अचानक इस रोग का शिकार होकर आ रहे है. डाॅक्टर कहते है वो लोग जो अपना ज्यादा वक्त रोड पर गुजारते है. बाइक पर चलते है. रोड किनारे दुकान चलाते है. जिस इलाके में ज्यादा धूल उड़ता है वहां रहते है. ऐसे लोग ज्यादा बीमार हो रहे है. डाॅ आलोक कहते है प्रदूषण कम से कम हो इस पर काम करना जरूरी है. घर से बाहर निकलते है तो मास्क का प्रयोग करे. शरीर में परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक के पास जाये.
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भागलपुर में वायु प्रदूषण की एक वजह यह भी बतायी जा रही है कि जिले के 167 स्वास्थ्य संस्थान बायो-मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन नहीं कर रहे हैं. इनमें 80 संस्थान सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से निबंधित नहीं हैं और पूर्व से निबंधित 87 संस्थानों ने खुद को अलग कर लिया है. इन स्वास्थ्य संस्थानों को नोटिस भेजने की तैयारी प्रशासन कर रहा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बायो-मेडिकल वेस्ट का नियम के दायरे में नष्ट करने की कार्रवाई नहीं करने पर यह हवा को जहरीला बनाने लगता है.
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