ऐसा गांव जहां सप्ताह में एक दिन नहाते हैं लोग, बच्चे छोड़ रहे स्कूल

Updated at : 11 Jul 2018 9:03 AM (IST)
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ऐसा गांव जहां सप्ताह में एक दिन नहाते हैं लोग, बच्चे छोड़ रहे स्कूल

लक्ष्मीनारायणपुर पंचायत के कोवा पकड़ी गांव में चार सौ से अधिक की आबादी परेशान अतिथियों के पहुंचने पर भोजन से ज्यादा चिंता पानी की पानी की कमी से दुधारू पशुओं ने दूध देना किया बंद सुशील कुमार सिंह लालगंज नगर : वैशाली जिले के लालगंज प्रखंड में एक ऐसा भी गांव है, जहां पानीकी किल्लत […]

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लक्ष्मीनारायणपुर पंचायत के कोवा पकड़ी गांव में चार सौ से अधिक की आबादी परेशान
अतिथियों के पहुंचने पर भोजन से ज्यादा चिंता पानी की
पानी की कमी से दुधारू पशुओं ने दूध देना किया बंद
सुशील कुमार सिंह
लालगंज नगर : वैशाली जिले के लालगंज प्रखंड में एक ऐसा भी गांव है, जहां पानीकी किल्लत के कारण लोग सप्ताह में एक बार स्नान करते हैं. स्थिति यह है कि पानी की किल्लत से बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है.
शादी-विवाह के मौसम में आने वाले अतिथियों की सूचना मिलने पर भोजन से ज्यादा ग्रामीणों को पानी की चिंता सताती है. बात हो रही है लक्ष्मीनारायणपुर पंचायत के कोवा पकड़ी गांव के वार्ड तीन स्थित दलित बस्ती की. प्रखंड कार्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस बस्ती का जलस्तर काफी नीचे चला गया है.
नतीजतन बीते दो महीने से इस बस्ती में अधिकांश चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है. सरकारी योजनाओं से लगाये गये चापाकल भी सूख गये हैं. एक-दो हैंडपंप हैं, जहां पानी के लिए सुबह से शाम तक कतार लगी रहती है. पानी की समस्या को देखते हुए बस्ती के लोग सप्ताह में एक दिन ही स्नान करते हैं. सबसे ज्यादा समस्या बस्ती के छात्र-छात्राओं को है, जो बिना स्नान किये ही स्कूल जाने को विवश हैं.
कुछ बच्चों ने शरीर से निकलने वाली बदबू के कारण स्कूल जाना भी छोड़ दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी को पानी नहीं दे पा रहे हैं. पंचायतवासी बबलू कुमार, मनीष कुमार, सरोज कुमार, अमरजीत कुमार, किशोरी देवी, मिंता देवी, गिरिजा देवी, रीता देवी, लक्ष्मी देवी, प्रमिला देवी, अनीता देवी, अमरजीत बैठा आदि ने बताया कि सरकारी सुविधाओं से वंचित महादलित बस्ती में पानी की समस्या को लेकर संबंधित सभी विभागों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की गयी है, लेकिन विभागीय पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण समस्या गंभीर होती जा रही है.
बोलीं बस्ती की महिलाएं, बच्चों की प्यास नहीं देखी जाती
इस बस्ती की सबसे बड़ी समस्या पानी की है. जिसके कारण स्नान, कपड़ा साफ करना और यहां तक खाना बनाने के लिए भी पानी का अभाव है.
सुशीला देवी, स्थानीय निवासी
बच्चे प्यास से बिलबिलाने लगते हैं. गांव के एक निजी चापाकल पर घंटों लाइन में लगाकर पीने के लिए पानी लाकर उन्हें पिलाते हैं. हमलोग जीते जी मर रहे हैं.
मुद्रिका देवी, स्थानीय निवासी
हमें लगता है कि किसी पहाड़ी क्षेत्र में रहते है. पानी के लिए मारा-मारी हो रही है. चापाकल पर लाइन में खड़े होने को लेकर लोगों के बीच नोकझोंक होती रहती है.
आशा देवी, स्थानीय निवासी
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है कि सभी पंचायतों में नल-जल योजना के तहत पानी मुहैया कराया जाये. जिसका लाभ इस गांव के लोगों को नहीं मिल रहा है. पानी की किल्लत के कारण मैं स्वयं सप्ताह में एक बार स्नान करता हूं. रामचंद्र बैठा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य
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