ललितग्राम-वीरपुर रेल लाइन सर्वे का काम तेज, सांसद बोले- मेरे कार्यकाल में पूरा कराने का प्रयास

Supaul News: सुपौल के ललितग्राम-वीरपुर रेल लाइन परियोजना का सर्वेक्षण कार्य जारी है. सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि उनके कार्यकाल में परियोजना पूरी कराने का प्रयास रहेगा. इससे सीमांचल और नेपाल सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

सुपौलसुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट

Supaul News: सीमांचल और कोसी क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित ललितग्राम-वीरपुर नई रेल लाइन परियोजना को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. लगभग 14 से 15 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य जारी है. रेलवे मंत्रालय द्वारा सर्वे के लिए आवश्यक राशि भी उपलब्ध करा दी गई है. सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा है कि सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना को मंजूरी दिलाने और कार्य शुरू कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा.

सर्वे रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

सांसद दिलेश्वर कामैत ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा. इसके बाद रेल मंत्रालय और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. उन्होंने कहा कि परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

रेल मंत्री से हुई बातचीत, मिला सकारात्मक संकेत

सांसद ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर रेल मंत्री से भी चर्चा की है. रेल मंत्री ने आश्वासन दिया है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में रेल संपर्क बहाल करने और नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. इससे क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगी है.

तीन वर्षों में परियोजना पूरी कराने का लक्ष्य

परियोजना की समयसीमा को लेकर सांसद ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि उनके शेष कार्यकाल के दौरान ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाए. उन्होंने कहा कि अगले लगभग तीन वर्षों में इस दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी.

नेपाल सीमा तक बेहतर कनेक्टिविटी का रास्ता

जानकारों का मानना है कि इस रेल लाइन के बनने से वीरपुर सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा. साथ ही नेपाल सीमा क्षेत्र तक आवागमन की सुविधा बेहतर होगी. इससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है.

वर्षों के जनआंदोलन का दिख रहा असर

वीरपुर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग लंबे समय से उठती रही है. सर्वदलीय संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों ने इस मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन, पदयात्रा, साइकिल मार्च, अनशन और जनजागरण अभियान चलाए थे. अब सर्वेक्षण शुरू होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि उनका वर्षों पुराना सपना जल्द साकार हो सकता है.

विकास की नई पटरी पर दौड़ेगा सीमांचल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास का नया अध्याय साबित होगी. इससे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे तथा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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