प्रभात खास: मकर संक्रांति के दिन ही हुआ था मिथिला के स्वर सम्राट रघु झा का जन्म
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jan 2016 6:42 PM
प्रभात खास: मकर संक्रांति के दिन ही हुआ था मिथिला के स्वर सम्राट रघु झा का जन्म -शास्त्रीय गायन में राष्ट्रीय पटल पर बनायी थी पहचान- पंचगछिया स्टेट से शुरू हुआ था संगीत का सफर – उनके गाये ख्याल आज भी राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित फोटो-05,कैप्सन- रघु झा का फाइल फोटोप्रतिनिधि, सुपौलनव गति नव लय, […]
प्रभात खास: मकर संक्रांति के दिन ही हुआ था मिथिला के स्वर सम्राट रघु झा का जन्म -शास्त्रीय गायन में राष्ट्रीय पटल पर बनायी थी पहचान- पंचगछिया स्टेट से शुरू हुआ था संगीत का सफर – उनके गाये ख्याल आज भी राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित फोटो-05,कैप्सन- रघु झा का फाइल फोटोप्रतिनिधि, सुपौलनव गति नव लय, ताल छंद नव,नवल कंठ नव जलद मंद्र नव,नव नभ के नव विहंग वृंद को,नव पर नव स्वर दे, वीणा वादिनी वर दे… निराला जी की इन पंक्तियों को महान गायक, मिथिला के स्वर सम्राट व संगीत चूड़ामणि पंडित रघु झा का स्वर मिला और यह मानव जीवन में नयी स्फूर्ति व नया उल्लास भरने का प्रतीक बन गया. महान संगीतज्ञ स्व झा ने सूर, तुलसी, विद्यापति दिनकर, नीरज, पंथ व नेपाली जैसे साहित्यकारों की रचनाओं को अपनी रागों के रंग से भर कर उसे अमर बना दिया. मकर संक्रांति के दिन हुआ था जन्म यूं तो रघु झा का जन्म सहरसा जिले के पंचगछिया में मकर संक्रांति के दिन ही हुआ था. पर, उनकी कार्यस्थली सुपौल रही. वे स्थानीय विलियम्स उच्च विद्यालय में संगीत शिक्षक थे. वर्ष 1965 में अपनी जिम्मेदारी अपने द्वितीय पुत्र विजय नाथ झा को सौंप कर वह मधेपुरा चले गये. 13 अप्रैल, 1967 को 55 वर्ष की अल्प आयु में ही बनारस स्थित ज्ञानवापी में वे ब्रह्मलीन हो गये. राय बहादुर से मिली संगीत की शिक्षामहान संगीतज्ञ रघु झा को संगीत की प्रथम शिक्षा पंचगछिया स्टेट के राय बहादुर लक्ष्मी नारायण सिंह से मिली थी. प्रसिद्ध गायक मांगन खब्बास इन्हीं के शिष्य थे. राय बहादुर के दरबार में देश के महान कलाकारों का आना-जाना लगा रहता था. हाथरस से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘संगीत’ में इन की रचनाएं प्रकाशित होती थीं, जिसके स्वरकार पंडित रघु झा होते थे. पंडित ओंकार नाथ ठाकुर, फैयाज खां जैसे महान गायकों से प्रशंसा पा चुके रघु झा के समकालीन गायकों में सीता राम हरि दांडेकर, सियाराम तिवारी, राम चतुर मलिक, बटुक खां, बाल मुकुंद झा, चंद्र शेखर खां, लक्ष्मी कांत झा, युगेश्वर झा आदि प्रमुख थे. अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन में बनायी पहचानपंडित झा का कार्यक्रम अक्सर पटना, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, काशी, इलाहाबाद, आगरा, जालंधर जैसे बड़े शहरों में हुआ करता था. अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन में उनके द्वारा प्रस्तुत राग जैजैवंती में बड़ा ख्याल तथा मध्य व छोटा ख्याल की राष्ट्रीय स्तर पर जम कर तारीफ हुई थी. उनके इस कार्यक्रम की रिकार्डिंग आज भी साहित्य एवं संगीत अकादमी दिल्ली के संग्रहालय में सुरक्षित है. रघु झा आकाशवाणी पटना में नियमित रूप से ख्याल गायन भी करते थे. उनके कई शिष्य आज भी संगीत के क्षेत्र में नाम रोशन कर रहे है. इनमें पद्म श्री शारदा सिन्हा, देबू झा, यदु ठाकुर, पुरंदर झा, राणा झा, दुखी चौपाल आदि शामिल हैं. उनके दो पुत्र विजय नाथ झा व मदन नाथ झा भी अच्छे गायक हैं. एशिया के महान व्यक्ति के रूप में स्व झा का नाम ‘रेफरेंस एशिया: एशियाज हू इज हू’ के चौथे संस्करण में शामिल करने का निर्णय लिया गया है. फिलहाल जब देश में शास्त्रीय संगीत का ह्रास हो रहा है. ऐसे समय में भी पंडित रघु झा की उपलब्धि व स्मृति आज भी विशेष कर मिथिला क्षेत्र के कण-कण में देदीप्यमान है. मकर संक्रांति की बेला में उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें शत-शत नमन.
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