नाबालिगाें को आसान शिकार बनाते हैं दरिंदे

Published at :24 Oct 2017 5:09 AM (IST)
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नाबालिगाें को आसान शिकार बनाते हैं दरिंदे

लड़कियां गांव व घरों के भी दरिंदों से सुरक्षित नहीं लोगों के नजरिया में नहीं आ रहा बदलाव सुपौल : धर्मग्रंथों में वर्णित यत्र नार्यस्तु पुज्यंते, रमन्ते तत्र देवता. यानी जहां नारियों को पूजा होती है, वहां ईश्वर का वास होता है. कथन सत्य है लेकिन समय ठीक इसके विपरीत है. इन दिनों जिले में […]

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लड़कियां गांव व घरों के भी दरिंदों से सुरक्षित नहीं

लोगों के नजरिया में नहीं आ रहा बदलाव
सुपौल : धर्मग्रंथों में वर्णित यत्र नार्यस्तु पुज्यंते, रमन्ते तत्र देवता. यानी जहां नारियों को पूजा होती है, वहां ईश्वर का वास होता है. कथन सत्य है लेकिन समय ठीक इसके विपरीत है. इन दिनों जिले में जिस तरह से महिलाओं की अस्मत लूटी जा रही है और उस पर अत्याचार किये जा रहे हैं. ये बात किसी से छिपी नहीं है. फिर चाहे वो बालिग हो या नाबालिग. अस्मत के लुटेरे यह भी समझ नहीं पाता है कि यह एक सामाजिक घृणित कार्य है.
जिले भर में घटित सिर्फ एक महीने के आंकड़ों को देखा जाय तो लगभग एक दर्जन से अधिक इस तरह की घटनाएं घट चुकी है. जिसमें शादी की नीयत से अपहरण से लेकर दुष्कर्म की घटनाएं शामिल है. सदर अस्पताल से प्राप्त जानकारी अनुसार इन घटनाओं में पीड़ित के कराये गये स्वास्थ्य परीक्षण पर गौर करें तो इस माह में 14 पीड़ितों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है. जिसमें से अधिकांश नाबालिग है.
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 17 साल के कम उम्र की 06 लड़कियां, 18-20 साल के 07 लड़कियां एवं एक 32 साल की महिला का मेडिकल जांच शामिल है. अस्मत के लुटेरों को भले ही पुलिस द्वारा इसके किये गये कारनामे की सजा दिलवायी गयी हो लेकिन एक सभ्य समाज इस कुकृत्य को लेकर परेशान दिख रहे हैं. हालांकि महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिये जिले में महिला थाना की स्थापना कर दी गयी है और महिला पुलिस द्वारा समय-समय पर विभिन्न मामलों को लेकर कार्रवाई भी की जाती रही है. जानकारों का कहना है कि इस मामले में दोषी को जल्द सजा मिलनी चाहिये, ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृति नहीं हो. हाल में किसनपुर के सुखासन में घास काटने गयी एक लड़की के साथ हुई दरिंदगी इस बात का गवाह है कि लड़कियां अपने गांव और घरों के भी दरिंदों से सुरक्षित नहीं है. वैसे भी सरकार द्वारा बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओं के अलावा आधी आबादी को समान अधिकार जैसे कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. बावजूद इसके समाज में आज भी ऐसे लोग हैं जिसका नजरिया आज तक नहीं बदल पाया है.
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिये पुलिस प्रयत्नशील है. जब भी इस तरह की शिकायत मिलती है, पुलिस तत्क्षण कार्रवाई करती है.
प्रेमलता भूपाश्री, महिला थानाध्यक्ष
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