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Srijan scam: सृजन घोटाला मामले में जमानत पर छूटे आरोपियों पर ED की नजर, संपत्ति की जा रही जब्त

Updated at : 05 Sep 2022 4:36 AM (IST)
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Srijan scam: सृजन घोटाला मामले में जमानत पर छूटे आरोपियों पर ED की नजर, संपत्ति की जा रही जब्त

Srijan scam: सृजन घोटाला मामले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारियों ने जमानत पर जेल से बाहर आये आरोपियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है. प्रवर्तन निदेशालय की टीम जमानत पर बाहर आये लोगों की संपत्ति की भी जांच कर रही है.

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भागलपुर: सृजन घोटाला मामले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारियों ने संपर्क करना शुरू किये हैं, जो जमानत पर जेल से बाहर आये हैं. ED के अधिकारी ने जमानत पर बाहर आये लोगों की संपत्ति की जांच शुरू की है, ताकि यह पता चल सके कि उनकी वास्तविक आमदनी क्या है और खर्च क्या है. इडी यह भी जानना चाह रही है कि इन लोगों ने कितना और कहां-कहां संपत्ति अर्जित की है.

जमानत पर बाहर आये लोगों से संपर्क कर रही टीम

ED के अधिकारी ने जमानत पर बाहर आये लोगों से संपर्क कर संपत्ति से संबंधित कागजात उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. वहीं उनके द्वारा किये गये लेनदेन से संबंधित कागजात के लिए संबंधित बैंकों से भी इडी ने संपर्क किया है. इस बाबत सूत्रों का कहना है कि इडी ऐसे लोगों के पास आय से अधिक संपत्ति का पता लगा रही है. इसके लिए इडी अन्य स्रोतों से भी जानकारी हासिल कर रही है, ताकि संबंधित लोग अगर संपत्ति छिपाने की कोशिश करे, तो उसे असफल किया जा सके.

घोटाला के आरोपियों की संपत्ति की जा रही जब्त

वहीं, ED सृजन घोटाला के आरोपितों की संपत्ति जब्त करने की लगातार कार्रवाई कर रही है. अब तक करोड़ों की संपत्ति जब्त कर चुकी है, जिसमें जमीन के प्लॉट, फ्लैट, वाहन और घर आदि हैं. दूसरी ओर सीबीआइ सृजन घोटाला के आरोपितों की संपत्ति जब्त करने की पूर्व में कार्रवाई कर चुकी है और अभी भी कर ही रही है

 क्या है सृजन घोटाला ?

इस घोटाले का नाम ‘सृजन घोटाला’ इस कारण पड़ा क्योंकि कई सरकारी विभागों की रकम सीधे विभागीय ख़ातों में न जाकर या वहां से निकालकर ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति’ नाम के एनजीओ के छह ख़ातों में ट्रांसफ़र कर दी जाती थी. इस घोटाले को अंजाम देने का ढंग अपने आप में अनोखा है. पुलिस मुख्यालय के एक वरीय अधिकारी के मुताबिक ‘फर्ज़ी सॉफ़्टवेयर बनाकर पासबुक को अपडेट किया जाता था. उसी सॉफ़्टवेयर से बैंक स्टेटमेंट निकाला जाता था. यह फ़र्ज़ी स्टेटमेंट बिल्कुल वैसा ही होता था, जैसा किसी सरकारी विभाग के इस्तेमाल और खर्च का होता है. दिलचस्प बात यह है कि घोटाले से जुड़े लोग इसी फ़र्ज़ी सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस राशि का ऑडिट भी करवा देते थे.’

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