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अगले वर्ष तक देश को खसरा रूबेला से मुक्त करने का लक्ष्य

Updated at : 12 Sep 2019 3:55 AM (IST)
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अगले वर्ष तक देश को खसरा रूबेला से मुक्त करने का लक्ष्य

सीवान : बिहार को अगले वर्ष तक खसरा-रूबेला (एमआर) से मुक्त करने की प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग ने एक और कोशिश शुरू की है. विभाग इस वर्ष केस बेस्ड सर्विलांस अभियान शुरू करने जा रहा है. बुधवार को आयोजित कार्यशाला में दिल्ली से आये पदाधिकारी डॉ बीपी सुब्रमनया ने बताया कि अक्टूबर 2013 में खसरा […]

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सीवान : बिहार को अगले वर्ष तक खसरा-रूबेला (एमआर) से मुक्त करने की प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग ने एक और कोशिश शुरू की है. विभाग इस वर्ष केस बेस्ड सर्विलांस अभियान शुरू करने जा रहा है. बुधवार को आयोजित कार्यशाला में दिल्ली से आये पदाधिकारी डॉ बीपी सुब्रमनया ने बताया कि अक्टूबर 2013 में खसरा आउटब्रेक सर्विलांस शुरू हुआ था.

इसके बाद 15 जनवरी 2019 को खसरा- रूबेला का नियमित टीकाकरण शुरू हो गया. इस अभियान के दौरान जिले में 100% प्रतिशत टीकाकरण हुआ जो कि अन्य जिलो की तुलना में काफी अधिक रहा. लगभग शत-प्रतिशत सफल टीकाकरण अभियान से मीजल्स-रूबेला के मरीजों में काफी कमी आयी है. इसलिए मीजल्स आउटब्रेक सर्विलांस के स्थान पर केस बेस्ड सर्विलांस सितंबर से शुरू किया गया है.
आउटब्रेक सर्विलांस के दौरान कम से कम पांच मामलों पर कार्यवाही होती थी, जबकि अब एक भी मामला पता चलने पर पूरी कार्यवाही होगी. उन्होंने बताया कि जिलों के सभी प्रखंडों से आये लोगों को प्रशिक्षित किया गया है. सरकार अगले वर्ष 2020 तक मीजल्स-रूबेला के उन्मूलन और रूबेला / जन्मजात रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) के नियंत्रण के लिए संकल्पबद्ध है.
इसलिए मीजल्स-रूबेला कई तरह के कदम उठाये जा रहे हैं. कार्यशाला में मुख्य रूप से जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ प्रमोद कुमार पांडेय, डब्लूएचओ के एसआरटीएल संजय कुमार सिंह, डीपीएम विश्वमोहन ने प्रशिक्षण के लिए आये लाभार्थियों प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, नोडल चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड अनुश्रवण व मूल्यांकन सहायकों को प्रशिक्षित किया.
बच्चों की मृत्यु दर घटेगी : एमआर वैक्सीन नियमित टीकाकरण का हिस्सा है. यह वैक्सीन की जगह ली है जो कि अभी 9-12 माह और 16-24 माह के बच्चों को दी जाती रही है.
इस टीकाकरण कार्यक्रम से प्रदेश में पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर कम होगी. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में रूबेला के संक्रमण से होने वाले गर्भपात और शिशु में अंधेपन, बहरेपन जैसी विकलांगता और जन्मजात हृदय रोग के मामलों में कमी आयेगी.
यह भी जानें
एमआर के दो टीके नौ माह से 12 माह के बीच और 16 माह से 24 महीने के बीच आवश्यक है
एमआर टीका सभी सत्र स्थलों में नियमित टीकाकरण के तहत पूरी तरह से मुफ्त लगाया जा रहा है.
इस टीकाकरण से जानलेवा साबित होने वाली बीमारियों से मिलेगी मुक्ति
इसी वर्ष जनवरी से मार्च तक चले अभियान में सीवान जिला अंर्तगत कुल 12 लाख से अधिक बच्चों को लगा था एमआर का टीका.
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