सफलता के पथ पर अग्रसर बेटियां

Published at :19 Jan 2017 4:54 AM (IST)
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सफलता के पथ पर अग्रसर बेटियां

बदलते गांव. विश्वनाथपुर के विकास से बुजुर्ग खुश, बस मान-सम्मान का इंतजार सीतामढ़ी : परिवर्तन की बयार से जिला मुख्यालय से सटा विश्वनाथपुर गांव भी वंचित नहीं है. राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक व धार्मिक कार्यक्रमों में अपनी अहम भूमिका रखने वाले विश्वनाथपुर गांव भी विकास के पथ पर अग्रसर है. शिक्षा से वंचित बकरी चराने वाली […]

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बदलते गांव. विश्वनाथपुर के विकास से बुजुर्ग खुश, बस मान-सम्मान का इंतजार

सीतामढ़ी : परिवर्तन की बयार से जिला मुख्यालय से सटा विश्वनाथपुर गांव भी वंचित नहीं है. राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक व धार्मिक कार्यक्रमों में अपनी अहम भूमिका रखने वाले विश्वनाथपुर गांव भी विकास के पथ पर अग्रसर है. शिक्षा से वंचित बकरी चराने वाली लड़कियां अब स्कूल में पढ़ रही है. युवा वर्ग को अपने जिम्मेदारी का बोध हुआ है. वे अपने परिवार के जीवकोपार्जन में कंधा से कंधा मिला कर अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं.
शिक्षा ग्रहण कर बने हैं जज व लोक अभियोजक : पूर्व मुखिया अरुण गोप, तप्पी राय, सुरेश झा, विनोद दाय, परमेश्वर राय, शिलानाथ झा, लालबाबू राय, राजेंद्र राय, गंगा राय, फेकन राय, वंशलोचन राय, काशीनाथ झा, लल्लू राय, प्रभुकांत यादव, रामू यादव, संजय पगला बाबा, नागेंद्र यादव, बेला यादव, सिकेंदर राय, अशोक राम, राजू राय, मदन यादव, जितेंद्र राय, सुरेश राय, मोहन झा, स्नेही राय, प्रमोद झा, भागीरथ राम, अमृत राम, रवींद्र राय, सत्यनारायण राय, हरि राय, अरविंद्र यादव, विजय राय, नरेश राय, दरेश राय व रामचंद्र राय बताते हैं कि गांव के रामपुकार यादव हाल में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर हुए हैं. रामेश्वर यादव उर्फ भोला बाबू वर्षों तक लोक अभियोजक रह चुके हैं.
प्रायोगिक परीक्षा में सफल हो रहीं लड़कियां : बताया कि शिक्षा को लेकर जबरदस्त जागरूकता आयी है. गरीब से गरीब आदमी भी अब अपने बच्चों को पढ़ा रहा है. शिक्षा को लेकर लड़का-लड़की का फर्क समाप्त हो गया है. यही कारण है कि यहां की बेटियां विभिन्न परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर गांव के मान-सम्मान को बढ़ा रही हैं. वर्तमान में ग्रामीण गजेंद्र राय की पुत्री अन्नु यादव चिकित्सक, अरुण गोप की पुत्री वंदना गोप एसबीआइ में ब्रांच मैनेजर, तन्नू फैशन डिजाइनर, सुकृति बैठा क्लर्क व अनिता कुमारी, रीता कुमारी, अर्चना कुमारी, रागिनी, रूबी व संगीता देवी शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. वहीं गांव के सुरेश झा, राजेंद्र राय, चंदेश्वर राय, रामकलेवर राय, कृष्णकांत झा राकेश कुमार व कामेश्वर राय न्यायालय में बतौर अधिवक्ता अपनी सेवा दे
रहे हैं. अंशु कुमार बैंक में पीओ व अभिषेक राज बीमा कंपनी में सहायक अधिकारी के पद पर कार्यरत है.
शराबबंदी से घर की खुशी लौटी : शराबबंदी ने गांव के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है. खासतौर पर महिलाओं के चेहरे की खुशी लौट गयी है. नशे के शिकार कुछ युवाओं को अब मान-सम्मान का मतलब समझ में आने लगा है. अब वे जीवकोपार्जन के लिए प्रयासरत रहते हैं.
खेती-बाड़ी में युवाओं का सहयोग मिल रहा है. इस कारण घर-घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. नतीजा सामने हैं कि लोगों की जीवनशैली बदल कर खुशहाल हो
गयी है. स्वच्छता का असर ऐसा है कि गरीब से गरीब लोग शौचालय निर्माण करा रहे है.
पूर्वजों की तरह नहीं मिल रहा मान-सम्मान : हर मामले में खुश गांव के बुजुर्ग मान-सम्मान को लेकर थोड़ा-बहुत दु:खी रहते हैं.
बताते हैं कि 1985 तक गांव के नेतृत्व की कमान अमीरी लाल राय, ब्रह्मदेव राय, हरिनंदन राय, सुखलाल राय, ऋषि लाल राय, राममोहन राय, सीताशरण राय, बृजनंदन राय, रूपण कपड़ी, सूरत लाल राय, रामाश्रय राय, रीझन राय, बजरंगी राय, रामनंदन झा, सुवंश झा, केदारनाथ झा, मुक्तिनाथ झा, भोना राम, मक्कखन राम, बिगुल राम व गोगल राम के कंधों पर थी. उनके बाद 1990 तक महेंद्र राय, जामुन राय, रामपदार्थ राय, रामरेखा राय, सियाशरण राय, किशोर राय, रामजोजन रामसोगारथ राय, सुखलाल राय, परीक्षण राय, काशीनाथ झा, फुदन झा, शंकर झा, आनंदी राय व शिवध्यान राय व 1990 से 2010 तक गांव का नेतृत्व अरुण गोप, त्रिलोकी राय, सियाशरण राय, सुरेंद्र राय, तप्पी राय, रामकृति राय, नागेंद्र राय व वीरेंद्र राय को मिली. तब तक पूरे गांव में एकता व भाईचारा का माहौल बना हुआ था. किसी के दु:ख से पूरे गांव के लोग दु:खी हो जाते थे. उनके फरमान को सभी खुशी-खुशी स्वीकार करते थे. अब ऐसा नहीं है. बुजुर्गों को अब पहले की तरह मान-सम्मान नहीं मिल
पा रहा है.
क्या कहती हैं मुखिया : मुखिया मनतोरिया देवी कहती है कि पूरे पंचायत के विकास के लिए प्रयासरत हूं. बिजली व सड़क का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. वे चाहेंगी कि विकास कार्यों को लेकर उनका कार्यकाल ऐतिहासिक हो.
विकास की बयार में गांव की अधिकांश सड़कों का पक्कीकरण हो चुका है. अधिकांश घर में बिजली, शौचालय व चापाकल समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं का इजाफा हुआ है. बुजुर्ग गांव के विकास व युवाओं के कर्तव्य बोध से खुश हैं.
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