अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती आज देंगे अर्घ

Published at :06 Nov 2016 5:57 AM (IST)
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अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती आज देंगे अर्घ

लोक आस्था का पर्व. भगवान भास्कर की उपासना को अखंड उपवास शुरू, घाट सज-धज कर तैयार बाजार में छठ को ले खरीदारी करते लोग एवं खरना करतीं छठव्रती. विभिन्न प्रकार के पकवानों से बने प्रसाद को किया अर्पित सीतामढ़ी : शुक्रवार से शुरू चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को व्रतियों ने दिन […]

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लोक आस्था का पर्व. भगवान भास्कर की उपासना को अखंड उपवास शुरू, घाट सज-धज कर तैयार

बाजार में छठ को ले खरीदारी करते लोग एवं खरना करतीं छठव्रती.
विभिन्न प्रकार के पकवानों से बने प्रसाद को किया अर्पित
सीतामढ़ी : शुक्रवार से शुरू चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को व्रतियों ने दिन भर उपवास रखकर संध्या में पवित्रता पूर्वक खरना किया. व्रतियों ने छठी माता को विभिन्न प्रकार के पकवानों से बने प्रसाद अर्पित किया.
इस मौके पर व्रतियों के परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहकर छठी माता से स्वस्थ्य काया व परिवार के कल्याण के लिए आशीष मांगे. बाद में सभी प्रसाद ग्रहण किये. इसके साथ ही छठ व्रती 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास शुरू की. व्रती पूरी पवित्रता के साथ आज भगवान आदित्य को अर्घ देने के लिए प्रसाद बनायेंगे. सूर्यास्त के बेला में व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगे. कल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रती इस चार दिवसीय छठ महाव्रत का समापन करेंगे.
दैहिक, दैविक, भौतिक तापों का होता है नाश: ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ कालीकांत झा के अनुसार सामाजिक स्तर पर अत्यंत प्रभावशाली माना जाने वाला सूर्योपासना का यह व्रत अति उत्कृष्ट श्रेणी का माना गया है. मान्यता है कि इस महाव्रत को करने से दैहिक, दैविक व भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिलती है. इसलिए इस व्रत को निर्धारित समय पर नियम-निष्ठा के साथ ही करना उचित होगा. यह जानना आवश्यक है कि जिस तिथि में सूर्योदय हो वह तिथि संपूर्ण मानी जाती है. इस बार रविवार का सूर्योदय षष्ठी तिथि में हो रहा है और सोमवार का सूर्योदय सप्तमी तिथि में हो रहा है, इसलिए रविवार को सायंकालीन व सोमवार हो प्रात:कालीन अर्घ्य देना ही श्रेयस्कर होगा.
उन्होंने बताया कि इस बार पंचमी तिथि शुक्रवार व शनिवार यानी दो दिन है. इसलिए कहीं-कहीं शुक्रवार को खरना, शनिवार को सांयकालीन व रविवार को प्रात:कालीन अर्घ्य दिया जा रहा है, जो बिल्कुल उचित नहीं है. क्योंकि शास्त्रानुसार षष्ठी तिथि में विसर्जन करना दोष माना जाता है. इसका प्रमाण स्कंद पुराण में वर्णित श्लोकों `नाग दिद्धा न कर्त्तव्या षष्ठी चैव कदायन‍. सप्तमी संयिताकार्या षष्ठी सर्वार्थ चिंतकै:, तुयाषष्ठी सप्तम्यां च तथास्तमी, दशम्येकादशी दिद्धा न ग्राह्या मुन्पुंगवै:
अर्थात पंचमी दिद्धा षष्ठी व्रत कभी नहीं करना चाहिए. कल्याण चिंतन करने वालों को सप्तमी से युक्त षष्ठी व्रत की करना चाहिए. साक्ष्य के रूप में कृत सिरोमणि, कृतसार व तिथि चंद्रिका आदि ग्रंथों को निर्णायक माना गया है और इस ग्रंथों के अनुसार सतयुग में राजा सगर ने पंचमी दिद्धा षष्ठी में छठ महाव्रत किया था, जिसके चलते उनके 60 हजार पुत्रों का नाश हो गया था, यानी उनके सहस्त्रों पुत्र मर गये थे.
सूर्य की असीम अनुकंपा की होती है वर्षा : डॉ कालीकांत झा के अनुसार षष्ठी नामक देवी कौमार्यावस्था में सूर्य मंडल में निवास करती हैं.
कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को अनुष्ठान पूर्वक उनकी आराधना करने से इस लोक में निवास करने वाले सभी मनुष्यों के संपूर्ण समस्याओं का विनाश हो जाता है और उत्तम फल की प्राप्ती होती है. प्रमुख रूप से शरीर की आरोग्यता के लिए इससे उत्तम और कोई उपासना नहीं मानी गयी है. षष्ठी देवी का निवास स्थान सूर्य मंडल एवं सूर्य के सानिध्य में होने के कारण ही इस व्रत का आराध्य भगवान भुवन भास्कर सूर्य को माना गया है. जो प्राणी विधि पूर्वक इस चार दिवसीय व्रत को संयम व नियम पूर्वक संपन्न करते हैं, उनके लिए भगवान सूर्य की असीम अनुकंपा की वर्षा होती है.
छठ घाट सज कर तैयार: रविवार को संध्याकालीन बेला में भगवान भास्कर को पहला अर्घ दिया जाना है. इसके लिए शनिवार को दिनभर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के घाटों को सजाने-संवारने का काम चलता रहा. शनिवार को नगर परिषद की ओर से लखनदेई नदी के विभिन्न घाटों के अलावा शहर के विभिन्न तालाबों पर घाट निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया गया. शहर के विभिन्न स्थानों पर आकर्षक गेट का निर्माण कराने के साथ ही कंट्रोल रूम व प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा था. घाटों के साथ-साथ शहर के आवश्यक स्थानों पर पर्याप्त रौशनी की व्यवस्था की जा रही थी.
षष्ठी तिथि में विसर्जन करना दोषपूर्ण
रविवार का सूर्योदय षष्ठी तिथि व सोमवार का सूर्योदय सप्तमी तिथि में हो रहा है, इसलिए रविवार को अस्ताचलगामी व सोमवार को सूर्य को अर्घ देना होगा श्रेयष्कर
देर रात तक लोग करते रहे खरीदारी
छठ पूजा के एक दिन पूर्व शनिवार को खरीददारी को लेकर शहर में जनसैलाब सा उमड़ पड़ा. आम तौर पर शहर में करीब 11 बजे के बाद भीड़ बढ़ती है, लेकिन शनिवार को सुबह से ही शहर से लेकर गांव तक का बाजार सज गया था. बाजारों में सुबह से ही खरीददारों की भीड़ उमड़ने लगी. यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा.
भीड़ के कारण आम से लेकर खास लोगों को भी आवागम में दिन भर परेशानियों का सामना करना पड़ा. भीड़ पर नियंत्रण के लिए शहर में दिनभर पुलिस को कसरत करनी पड़ी. कपड़ों व पूजा सामग्री की दुकानों पर सबसे अधिक भीड़ देखी गयी. लोग दिनभर छठ पूजा की तैयारी में व्यस्त रहे.
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