कलेक्ट्रेट कांड के दोषी जमानत पर छूटे

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दो जून को नेताओं की हुई थी गिरफ्तारी, 23 को पटना हाइकोर्ट ने दी थी जमानत सीतामढ़ी/मुजफ्फरपुर : कलेक्ट्रेट गोलीकांड में सजायाफ्ता दो पूर्व सांसद व एक विधायक समेत सभी 14 लोगों को मुजफ्फरपुर की केंद्रीय कारा से रिहा कर दिया गया. रिहाई हाइकोर्ट के ओर से जमानत के कागजात मिलने के बाद हुई. रिहा […]

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दो जून को नेताओं की हुई थी गिरफ्तारी, 23 को पटना हाइकोर्ट ने दी थी जमानत

सीतामढ़ी/मुजफ्फरपुर : कलेक्ट्रेट गोलीकांड में सजायाफ्ता दो पूर्व सांसद व एक विधायक समेत सभी 14 लोगों को मुजफ्फरपुर की केंद्रीय कारा से रिहा कर दिया गया. रिहाई हाइकोर्ट के ओर से जमानत के कागजात मिलने के बाद हुई. रिहा होकर सीतामढ़ी पहुंचे सभी नेताओं का भव्य स्वागत किया गया. पटना हाइकोर्ट ने सभी को 23 जून को जमानत दे दी थी.

जेल से रिहाई के साथ ही नेताओं को उनके समर्थकों ने घेर लिया. काफिले के साथ नेता सीतामढ़ी गयी, जहां इनका भव्य स्वागत किया गया. इससे पहले समर्थक फूलमाला के साथ खुदीराम बोस केंद्रीय कारा पहुंचे थे. कारा से निकलने से साथ ही नेताओं का माला पहनाकर स्वागत किया गया. केंद्रीय कारा से निकल कर सभी लोग मेडिकल पहुंचे, जहां पूर्व सांसद अनवारूल हक के साथ उनके समर्थक मौजूद थे. मेडिकल में ही जेल संचिका पर हस्ताक्षर करवा कर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.

रिहा होने वालों में पूर्व सांसद सह जदयू के वरीय नेता नवल किशोर राय, पूर्व सांसद सह राजद के वरीय नेता मो अनवारूल हक, परिहार से भाजपा विधायक रामनरेश यादव, जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष मोहन कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष रालोसपा राम लक्षण सिंह कुशवाहा, राजद के प्रदेश महासचिव मनोज कुमार, शिवहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मो असद, पूर्व मुखिया, भूपभौरो महेंद्र यादव, पूर्व जिला पार्षद कौशल किशोर राय, उपाध्यक्ष जदयू, सीतामढ़ी अनिल कुमार सिंह चुम्मन, भाकपा नेता विश्वनाथ बुंदेला, सिपाही सूर्यदेव राय, जदयू के पूर्व नेता

विपिन बिहारी यादव, मदन राय में शामिल हैं. वहीं, विनोद प्रसाद को अन्य मामले में आरोपित होने के वजह से जमानत नहीं मिली.

सभी नेताओं को कलेक्ट्रेट गोलीकांड में दोषी पाये जाने के बाद दो जून को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद चार जून को सभी को दस-दस साल की सजा सुनायी गयी थी. इसके साथ ही इन्हें केंद्रीय कारा मुजफ्फरपुर भेज दिया गया था. इसके बाद नेताओं की ओर से जमानत के लिए हाइकोर्ट में अरजी दी गयी थी. कलेक्ट्रेट गोलीकांड में फैसला 17 साल के बाद आया था. ये 11 अगस्त 1998 को उस समय हुआ था, जब कलेक्ट्रेट पर जदयू व कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से बाढ़ राहत की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया. इस दौरान हिंसक हुये आंदोलन के दौरान लाठी व फायरिंग में हुई थी, जिसमें विधायक रामचरित्र यादव समेत पांच लोगों की मौत हुई थी.

मामले में दोषी ठहराये गये लोगों व अन्य राजनीतिक प्रतिनिधियों की ओर से कलेक्ट्रेट कांड के समय सीतामढ़ी में तैनात डीएम व एसपी के खिलाफ मुकदमा चलाये जाने की मांग कर रहे हैं. इसको लेकर 12 जून को पूर्व सांसद नवल किशोर राय व परिहार विधायक राम नरेश ने जेल में सत्याग्रह किया था. इसी दिन सीतामढ़ी में विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी सत्याग्रह का आयोजन किया गया था. इसमें सजा पाये नेताओं के परिजन भी शामिल थे.

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