जोंका पुल पर अक्सर जाम से राहगीर परेशान
Updated at : 05 Dec 2019 1:21 AM (IST)
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लगन के दिनों में सुबह से शाम तक लगा रहता है जाम सीतामढ़ी : शहर से सटे बरियारपुर-टंडसपुर सीमा पर फोरलेन चौराहे के समीप एनएच-104 स्थित जोंका पुल पर अक्सर जाम लगे रहने के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यह परेशानी पिछले कई वर्षों से बनी हुई है. लग्न […]
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लगन के दिनों में सुबह से शाम तक लगा रहता है जाम
सीतामढ़ी : शहर से सटे बरियारपुर-टंडसपुर सीमा पर फोरलेन चौराहे के समीप एनएच-104 स्थित जोंका पुल पर अक्सर जाम लगे रहने के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
यह परेशानी पिछले कई वर्षों से बनी हुई है. लग्न शुरू हो चुका है. जिस दिन शादी-विवाह या अन्य मांगलिक आयोजनों का शुभ मुहूर्त होता है, उस दिन आम यात्रियों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
कई बार तो सुबह से देर रात तक लगातार पुल पर जाम का नजारा बना रहता है, जिसके चलते आम यात्रियों को अपना रूट बदलकर लंबी दूरी तय कर अपनी मंजिल तक का सफर करना पड़ता है. जाम के कारण अक्सर पुल के दोनों किनारे बड़ी-छोटी वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. हालत यह हो जाती है कि साइकिल एवं बाइक सवारों को भी पुल पार कर निकलना मुश्किल हो जाता है.
अंग्रेज के जमाने में बने थे दोनों पुल
बता दें कि उक्त स्थल पर दो छोटे-छोटे पुल है, जो अंग्रेजी शासन काल काबना हुआ है. पुल काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है. पुल पर बनी सड़क पर पिछले कई सालों से जगह-जगह खतरनाक गड्ढ़ा बना हुआ है. वाहनों के धक्कों से पुल की रेलिंग भी कई जगहों पर खराब हो चुका है.
पुल पर बनी सड़क पर इतने खतरनाक गड्ढ़े बन आये हैं कि पुल से गुजरने के दौरान वाहन चालकों को काफी संभलकर वाहनों को पुल को पार करना पड़ता है. करीब तीन वर्ष पूर्व जब एनएच चौड़ीकरण समेत निर्माण शुरू हुआ तो लोग उम्मीद करने लगे कि जल्द ही अंग्रेज के जमाने के जर्जर पुल से निजात मिलेगा, लेकिन सड़क निर्माण की गति को देखते हुए लोग निराश हैं.
पुल के नवनिर्माण तक बनी रहेगी समस्या : हालांकि, पुल पर अक्सर जाम लगने की समस्या के मद्देनजर बथनाहा पुलिस के जवान उक्त स्थल पर 24 घंटे के लिए अलग-अलग पालियों में तैनात रहते हैं, लेकिन फिर भी जाम की समस्या से राहगीरों को राहत नहीं मिल पा रही है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक पुल का नवनिर्माण नहीं हो जाता, जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पाएगा, क्योंकि पुल की चौड़ाई भी काफी कम है. पुल अंग्रेज के जमाने की आबादी की क्षमता के आधार पर बनायी गयी थी. उस जमाने के मुकाबले आज की आबादी एवं वाहनों की संख्या में कई गुणा इजाफा हो चुका है.
बताना जरूरी है कि उक्त पुल इतना महत्वपूर्ण है कि वहां से प्रतिदिन विभिन्न रूटों के लिए हजारों छोटी-बड़ी वाहनों के साथ ही हजारों आम राहगीर गुजरते हैं. साथ ही प्रतिदिन देश के विभिन्न राज्यों से जानकी जन्म भूमि, सीतामढ़ी व नेपाल के जनकपुर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से खचाखच भरे दर्जनों पर्यटक बसें उक्त पुल से गुजरती है.
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