निलंबन के हो गये 44 माह नहीं मिला जीवनयापन भत्ता

Updated at : 25 Apr 2019 1:01 AM (IST)
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निलंबन के हो गये 44 माह नहीं मिला जीवनयापन भत्ता

बाजपट्टी : प्रखंड के मवि, मधुबन के प्रभारी प्रधान रहे योगेंद्र कुमार के निलंबन के करीब 44 माह हो गये है, पर अब तक उन्हें जीवनयापन भत्ता मिलना शुरू नहीं हुआ है. फलतः उनकी आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गयी है. पैसे के अभाव में उनका हर काम प्रभावित हो गया है. बच्चों की पढ़ाई से […]

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बाजपट्टी : प्रखंड के मवि, मधुबन के प्रभारी प्रधान रहे योगेंद्र कुमार के निलंबन के करीब 44 माह हो गये है, पर अब तक उन्हें जीवनयापन भत्ता मिलना शुरू नहीं हुआ है. फलतः उनकी आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गयी है.

पैसे के अभाव में उनका हर काम प्रभावित हो गया है. बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर में होने वाले खर्च को लेकर श्री कुमार काफी परेशान है. उन्हें कब से भुगतान मिलना शुरू होगा, यह कोई नहीं बता पा रहा है.

क्या है पूर्व प्रभारी का आरोप

शिक्षक श्री कुमार पर बच्चों को निर्धारित दर से कम छात्रवृत्ति की राशि देने एवं शेष राशि गबन करने का आरोप है. इसके अलावा स्कूल के भवन निर्माण को मिली राशि में से 13 लाख 98 हजार 568 रुपये का गबन करने का भी आरोप है. इस मामले में उन पर स्थानीय थाना में एक प्राथमिकी दर्ज है. गबन में श्री कुमार को 11 माह जेल में रहना पड़ा था.

यह मामला वर्ष 2016 का ही है. छात्रवृत्ति गबन में उन्हें डीपीओ के द्वारा 20 अगस्त 2015 को निलंबित किया गया था. अब भी निलंबित ही है. निलंबन से मुक्ति के साथ ही जीवन यापन भत्ता के लिए श्री कुमार हर सक्षम अधिकारी के यहां गुहार लगाकर थक चुके है. उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है.

कहां फंसा है पेच

बीइओ मीरा कुमारी व बीआरपी मनोज कुमार कहते है कि जुलाई-15 से वेतनमान लागू है. सभी शिक्षकों ने वेतन निर्धारण करा लिया, लेकिन श्री कुमार ने नहीं कराया. दक्षता परीक्षा भी पास नहीं किये है. इसी के चलते जीवनयापन भत्ता लंबित रह गया. शिक्षक का कहना है कि वेतन निर्धारण करना कार्यालय का काम है.

वे बीआरसी में कई बार गये. हर बार सर्विस बुक व अन्य कागजात नहीं मिलने की बात कह कार्यालय से लौटा दिया जाता रहा. बताया, वे प्रशिक्षित शिक्षक है. 2015 में दक्षता परीक्षा हुई थी, जिसमें वे असफल हो गये थे. परीक्षा पास करने से वेतन में हजार रुपये की बढ़ोतरी होती है और कुछ नहीं.

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