सच्चा मुसलमान वो है, जिससे कोई खतरा महसूस न करे
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Mar 2018 2:32 AM (IST)
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बोले मौलाना मदनी कन्हवां मदरसा के शताब्दी समारोह का समापन बेला/परिहार : जमियत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुसलमान के पास दो हथियार है. एक उसका ईमान और दूसरा इस्लाम. उनका कहना था कि सच्चा मुसलमान वो है, जिससे जान-माल सुरक्षित रहे. मुसलमान वो है, जिससे कोई खतरा महसूस न करे. […]
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बोले मौलाना मदनी
कन्हवां मदरसा के शताब्दी समारोह का समापन
बेला/परिहार : जमियत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुसलमान के पास दो हथियार है. एक उसका ईमान और दूसरा इस्लाम. उनका कहना था कि सच्चा मुसलमान वो है, जिससे जान-माल सुरक्षित रहे. मुसलमान वो है, जिससे कोई खतरा महसूस न करे. कन्हवा मदरसा के शताब्दी समापन समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने उक्त बातें कही. कहा, समाज से बुराई को मिटाने में धर्म से बड़ा कोई हथियार नही है. इस्लाम धर्म देशवासियों से दोस्ताना संबंध स्थापित करने की सीख देता है. हम भारतियों के लिए आपसी प्यार व सहिष्णुता अधिक महत्वपूर्ण है.
आगाज से कम नहीं रहा समापन : पिछले तीन दिनों से चले आ रहे शताब्दी समारोह का समापन सोमवार को हो गया. जिस जज्बे के साथ लोगों ने समारोह के आगाज में शिरकत की, उसी जज्बे व कुछ सीखने के मकसद से हजारों लोग समापन समारोह के गवाह बने. मदरसा के सचिव मौलाना इंजहारुल हक के धन्यवाद ज्ञापन व दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. इससे पूर्व रविवार के समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ शकील अहमद भी शामिल हुए थे. मदरसा की अहमियत पर प्रकाश डाला था.
बकौल डॉ अहमद, देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद व प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद मदरसा से भी तालिम हासिल किये थे. उनका कहना था कि औरंगजेब व शिवाजी के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी, जिसे कुछ लोग हिंदू-मुसलमान की लड़ाई बता कर राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं.
1200 कंठस्थ हाफिज का हुआ सम्मान
समापन समारोह के दौरान उक्त मदरसा से तालिम पाकर विभिन्न जगहों पर कार्यरत 1200 कंठस्थ हाफिज को सम्मानित किया गया. वह पल काफी खुशनुमा लग रहा था, जब एक साथ 1200 हाफिजों को पहले पाग पहनाया गया और बाद में अंगवस्त्र, किताबें व प्रमाण-पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया जा रहा था. तालियों की मधुर धुन के बीच हाफिजों की तालिम, तीक्ष्ण बुद्धि व उनकी उच्च योग्यता का सम्मान किया गया. सभी हाफिज सम्मान पाकर गर्व महसूस कर रहे थे.
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