धर्मनाथ मंदिर न्यास में लाखों का घोटाला, राज्य न्यास पर्षद ने समिति को किया भंग

Updated at : 03 Apr 2024 10:24 PM (IST)
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धर्मनाथ मंदिर न्यास में लाखों का घोटाला, राज्य न्यास पर्षद ने समिति को किया भंग

शहर के प्रसिद्ध धर्मनाथ मंदिर के राजस्व में घोटाले की बात सामने आ रही है. यह घोटाला कोई और नहीं समिति के ही कुछ सदस्यों ने किया है.

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छपरा.

शहर के प्रसिद्ध धर्मनाथ मंदिर को प्राप्त होने वाले राजस्व में घोटाले की बात सामने आ रही है. यह घोटाला कोई और नहीं समिति के ही कुछ सदस्यों ने किया है. मामला सामने आने के बाद राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने पूरे समिति को भंग कर दिया है और सदर एसडीओ से नये सिरे से समिति का गठन करने का आग्रह किया है. वहीं नयी समिति के गठन होने तक धर्मनाथ मंदिर न्यास का संचालन खुद एसडीओ से करने का आग्रह किया गया है.

दो साल पहले गठित हुई थी समिति :

जानकारी हो की रामनाथ मंदिर न्यास की परिसंपत्तियों की सुरक्षा, सुचारु प्रबंधन एवं समयक विकास के लिए 18 फरवरी, 2022 को धार्मिक न्यास परिषद पटना ने एसडीओ की अध्यक्षता में पांच वर्षों के लिए नयी समिति का गठन किया गया था, लेकिन महज दो साल ही बीते हैं कि मंदिर को प्राप्त होने वाले राजस्व में घोटाले के आरोप प्रत्यारोप लगने लगे.

क्या है पूरा मामला :

राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन ने एसडीओ सदर को पत्र में बताया है कि धर्मनाथ मठ रतनपुरा के लिए गठित समिति के सचिव राकेश कुमार ने दो फरवरी, 2024 को एक आवेदन देकर कहा है कि समिति के कुछ सदस्य मंदिर में होने वाली आये दानपेटी से आय वह अन्य प्राप्त राजस्व को ना तो कोषाध्यक्ष को देते हैं और ना ही सचिव को देते हैं. उसे घर ले जाते हैं और उसका निजी प्रयोग करते हुए घोटाला किया जा रहा है. शिकायत के बाद आरोपियों को नोटिस जारी किया

गया. 14 मार्च को दोनों को पक्षों को बुलाया गया था :

दोनों पक्ष 14 मार्च को राज्य न्यास परिषद के सामने उपस्थित हुए. एक सदस्य ने अधिकारियों को बताया कि मंदिर के दानपेटी का रुपया उनके पर्सनल मैनेजर द्वारा ले जाया गया था, लेकिन वह राशि सचिव को उपलब्ध करादी गयी थी, जबकि इसका कोई साक्ष्य नहीं दिया गया. जो राशि जुलाई, अगस्त, सितंबर में निकाली गयी थी वह छह से आठ माह बाद बैंक में न्यास के खाते में जमा करायी गयी जिसका कोई औचित्य समझ में नहीं आ रहा है. इसके बाद अधिकारियों ने काफी नाराज की जतायी और कहा कि मंदिर की राशि किसी को अपने घर ले जाने का कोई अधिकार नहीं है. जो भी राजस्व प्राप्त होता है उसको सचिव और कोषाध्यक्ष बैंक में जमा करायेंगे उनको ही आर्थिक जिम्मेदारी होती है. इस क्रम में यह भी बात सामने आयी है कि कुछ लोग फर्जी रसीद के माध्यम से अवैध वसूली कर रहे हैं. इसके कई साक्षी उपलब्ध कराये गये. मंदिर के न्यास समिति के बीच चल रहे मतभेद का नाजायज लाभ मंदिर परिसर में स्थित दुकानों के दुकानदार उठा रहे हैं. मंदिर परिसर में व्यवसाय करने वाले दुकानदार किराया जमा नहीं कर रहे हैं.

कैमरे के सामने करनी थी दानपेटी के रुपये की निकासी :

समिति के गठन के साथ ही कहा गया था कि जो भी राजस्व प्राप्त होगा उसे कमरे की नजर में लाया जायेगा और तब बैंक में जमा किया जायेगा, ताकि पारदर्शिता लायी जा सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया जो कई संदेह उत्पन्न कर रहा है. जानकारों की माने तो यदि सही से जांच हो जाये तो कई लाख के घोटाले का मामला सामने आयेगा. इसमें समिति के कई बड़े सदस्य भी फंस सकते हैं. राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने सदर एसडीओ को पत्र के माध्यम से कहा है कि एसडीओ ही न्यास समिति के अध्यक्ष होते हैं और अभी तक की जो भी अनियमितताएं हैं उसके लिए कार्रवाई होनी चाहिए. फिलहाल एक दो अच्छे लोगों को साथ लेकर न्यास का संचालन किया जा सकता है. वहीं 21 जून, 2024 के पहले 11 सदस्य का नाम परिषद को उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि नयी समिति का गठन किया जा सके.

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