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सारण संसदीय क्षेत्र के लिए चुनाव प्रचार का शोर थमा, कनवाशिंग में लगे उम्मीदवार व समर्थक

एनडीए के राजीव प्रताप रूडी, महागठबंधन की डॉ रोहिणी आचार्य, भारतीय सार्म्थय पार्टी के उम्मीदवार व पूर्व एमएलए शत्रुध्न तिवारी समेत 14 उम्मीदवारों ने पूरे दिन रोड शो व भाषण के साथ-साथ मतदाताओं से समूहों में बंट कर अपने पक्ष में मतदान के लिए वोट मांगा.

छपरा (सदर). सारण संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 20 मई को होने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार का शोर शनिवार को संध्या छह बजे थम गया. पूरे दिन विभिन्न महागठबंधनों के उम्मीदवारों के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों से खड़े उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकते दिखे. विभिन्न उम्मीदवारों के पक्ष में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने आकर प्रचार-प्रसार भी किया. वहीं एनडीए के राजीव प्रताप रूडी, महागठबंधन की डॉ रोहिणी आचार्य, भारतीय सार्म्थय पार्टी के उम्मीदवार व पूर्व एमएलए शत्रुध्न तिवारी समेत 14 उम्मीदवारों ने पूरे दिन रोड शो व भाषण के साथ-साथ मतदाताओं से समूहों में बंट कर अपने पक्ष में मतदान के लिए वोट मांगा. शाम छह बजे के बाद चुनाव प्रचार खत्म होते ही विभिन्न दलों के द्वारा वाहनों के माध्यम से लाउड स्पीकर द्वारा किये जाने वाले प्रचार को शोर थमते ही मतदाताओं को ध्वनि प्रदूषण से राहत मिली. उधर चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद उम्मीदवार अलग-अलग तरीके से मतदाताओं से कनवाशिंग करते दिखे.

उम्मीदवारों की बैचेनी के बीच मतदाता दिखे मौन

चुनाव के अंतिम दिन भी भले ही उम्मीदवारों द्वारा अपने पक्ष में मतदान के लिए पूरी ताकत झोंकी गयी, परंतु मतदाता पूरे चुनाव में अपने को मूकबधिर के रूप में उम्मीदवारों के समक्ष प्रस्तुत हो रहे हैं. सिर्फ वैसे मतदाता जो जातिय आधार पर गोलबंद है, वहीं किसी भी दल के उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष की चर्चा करते है. आम मतदाताओं को किसी पार्टी के दल या उम्मीदवार के प्रति कोई रूचि नहीं दिख रही है.

महाराजगंज के 75 फीसदी सर्विस मतदाताओं ने नहीं किया मतदान

महाराजगंज संसदीय क्षेत्र के मतदान कर्मियों के लिए गत दिन हुए प्रशिक्षण के दौरान 149 मतदान कर्मियों द्वारा मतदान के लिए फार्म ए भरा गया था. परंतु, 17 तथा 18 मई को महाराजगंज के वैसे मतदान कर्मी जिनका घर सारण जिला या सारण जिले के बाहर है तथा उनकी ड्यूटी 25 को महाराजगंज में चुनाव के लिए है. उनके मतदान की व्यवस्था समाहरणालय में की गयी थी. परंतु, 149 मतदान कर्मियों में महज 25 ने ही मतदान किया. जबकि 60 फीसदी मतदान कर्मियों ने प्रशिक्षण के दौरान आपसी समन्वय के आभाव में फार्म 12 ए भरकर मतदान के लिए जमा ही नहीं किया था. ऐसी स्थिति में मतदान कर्मियों के इतने कम मतदान से जिला प्रशासन के द्वारा मतदाता जागरूकता के तहत मतदान का प्रतिशत बढ़ाये जाने के लिए किये जा रहे प्रयासों को झटका लगा है.

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