मां से मिथिला पेंटिंग, तो सास से सीखी पेपरमेसी

Published at :08 Dec 2015 6:50 PM (IST)
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मां से मिथिला पेंटिंग, तो सास से सीखी पेपरमेसी

मां से मिथिला पेंटिंग, तो सास से सीखी पेपरमेसी विदेशों में भी है हेमा की कलाकृतियों की डिमांड पेपरमेसी कला में निपुण राज्य शिल्प पुरस्कार से नवाजी शिल्पकार हेमा बेकार पेपर का उपयोग कर बनाती है कलाकृतियांनोट: फोटो मेल से भेजा गया है. संवाददाता, दिघवारा/सोनपुरकला को समझने व जानने की भूख हर उम्र के कलाकारों […]

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मां से मिथिला पेंटिंग, तो सास से सीखी पेपरमेसी विदेशों में भी है हेमा की कलाकृतियों की डिमांड पेपरमेसी कला में निपुण राज्य शिल्प पुरस्कार से नवाजी शिल्पकार हेमा बेकार पेपर का उपयोग कर बनाती है कलाकृतियांनोट: फोटो मेल से भेजा गया है. संवाददाता, दिघवारा/सोनपुरकला को समझने व जानने की भूख हर उम्र के कलाकारों में होती है. निरंतर प्रशिक्षण प्राप्त कलाकार ही अपने हुनर को विकसित कर देश व राज्य में अपनी अलग पहचान स्थापित कर पाता है. कला सीखने की कोेई जगह नहीं होती है. फिर चाहे मायके हो या ससुराल. हर जगह हुनर को तराशा जा सकता है. विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले के कला शिल्प ग्राम में उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान केंद्र, पटना द्वारा लगाये गये स्टॉल पर पेपरमेसी विधि की उत्कृष्ट कलाकार व राज्य शिल्प पुरस्कार से नवाजी गयी, हेमा के हाथों की बनी अनगिनत कलाकृतियां मेला घूमने आनेवाले दर्शनार्थियों का मन मोह रही है. इस शिल्पकार की कलाकृतियों को देखते ही लोगों के कदम ठिठक जाते हैं और फिर महिला शिल्पकार के इस हुनर को देख कर हर कोई कह उठता है वाह हेमा वाह. उनकी कलाकृतियों की विदेशों में भी खूब मांग है.पेपरमेसी की उत्कृष्ट कलाकार है हेमापटना की किदवई पुरी में रहनेवाली हेमा पेपरमेसी की विलक्षण कलाकार हैं एवं देश के कई राज्यों में अपने हुनर का प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं. वह बराबर कई राज्यों में जाकर इच्छुक लोगों को पेपरमेसी की ट्रेनिंग भी देती है. मौजूदा समय में सोनपुर मेले में एक स्टॉल पर हेमा दर्शनार्थियों को पेपरमेसी की कलाकारियों से रू-ब-रू कराकर बेकार पेपर से उपयोगी व आकर्षक वस्तु बनाने का हुनर बता रही है. कलाकृतियों में दिखती है जीवंतता शिल्पकार हेमा बताती हैं कि दरभंगा के रशीदपुर अवस्थित मायके के जिस घर में उनकी परवरिश हुई, वहां मां लीला देवी मिथिला पेंटिंग की कलाकार थी. इस कारण मां ने मिथलो पेंटिंग का हुनर सिखाया और इसी जिले के सलेमपुर अवस्थित ससुराल पहुंची, तो पेपरमेसी की कला निपुण व नेशनल पुरस्कार विजेता सास शुभद्रा देवी ने पेपरमेसी का काम सिखाया. मां व सास के सिखाये गुणों की बदौलत ही हेमा राष्ट्रीय स्तर की पेपरमेसी की शिल्पकार है. हेमा जब बेकार पेपर से कलाकृतियों को बना कर उस पर मिथिला पेंटिंग करती है, तो आकृतियां बोल उठती हैं एवं उन आकृतियों में मानो जीवंतता लौट आती है. क्या है पेपरमेसी (बॉक्स के लिए)हेमा बताती हैं कि पेपरमेसी आर्ट दरअसल उपयोग के बाद बेकार कागजों से तैयार की जानेवाली कलाकृतियां व उपयोगी सामान बनाने की कला है. इस कला के जरिये उन बेकार न्यूज पेपर से एक से बढ़ कर एक कलाकृतियां बनायी जा सकती हैं. हेमा बताती हैं कि पेपर को गला कर उसका चूर्ण बनाया जाता है फिर मुलतानी मिट्टी के साथ उसे गिली मिट्टी जैसा स्वरूप देते हैं. फिर इसी मिट्टी से हाथों के सहारे खिलौने, मूर्ति व सजावट का सामान बनाया जाता है. सजावटी सामान पर मधुबनी पेंटिंग अथवा रंगाई कर फाइनल टच दिया जाता है. हेमा की बनायी कलाकृतियों की विदेशों में खूब मांग है. जर्मनी, फ्रांस, इंगलैंड, अमेरिका जैसे देशों में हेमा की बनायी कलाकृतियों की खूब डिमांड है. इन देशों में इन कलाकृतियों के खूब दाम मिलते हैं.

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