मॉडर्न होते जा रहे हैं शहर के बाजार

Updated at : 22 Nov 2019 6:46 AM (IST)
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मॉडर्न होते जा रहे हैं शहर के बाजार

छपरा : बीते एक दशक में शहर के बाजारों का विकास काफी तेजी से हुआ है. महानगरों की तर्ज पर बाजारों में बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल खड़े किये जा रहे है. वहीं रेस्तरां, सुविधा संपन्न होटल और कई बड़े मॉल्स बाजारों की शोभा बढ़ा रहें है. विकास के इस दौर में बाजारों में बुनियादी सुविधाओं का […]

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छपरा : बीते एक दशक में शहर के बाजारों का विकास काफी तेजी से हुआ है. महानगरों की तर्ज पर बाजारों में बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल खड़े किये जा रहे है. वहीं रेस्तरां, सुविधा संपन्न होटल और कई बड़े मॉल्स बाजारों की शोभा बढ़ा रहें है. विकास के इस दौर में बाजारों में बुनियादी सुविधाओं का अब भी घोर आभाव दिख रहा है.

छपरा के बाजार विकसित तो हो रहे है, लेकिन यहां आने वाले लोगों को सभी सुविधाएं नहीं मिल पाने से दूसरे जिलों के विकसित बाजारों व वहां की उपलब्ध व्यवस्थाएं आज भी शादी व अन्य मौको पर खरीदारी के लिए विकल्प बनते जा रहा है. शहर के गुदरी बाजार, साहेबगंज, हथुआ मार्केट व सरकारी बाजार व्यवसाय के प्रमुख केंद्र माने जाते है. लेकिन इन बाजारों में न तो, शौचालय मौजूद है और ना ही बाहर से आने वाले ग्राहकों को वाहन की पार्किंग के लिए उचित जगह मिल पाती है.
यात्री शेड का इन बाजारों में घोर अभाव है. सामान खरीदने के बाद यात्री वाहन के इंतजार में घंटों सड़क किनारे ही खड़े रहना पड़ता है. छपरा शहर को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद कई योजनाओं को प्रस्तावित किया गया, जिसमें शहर के बाजारों का बुनियादी विकास शामिल था.
शहर के बाजारों में बुनियादी सुविधाओं का है घोर अभाव
अंग्रेजों के समय में विकसित थे बाजार
शहर के गुदरी बाजार व सरकारी बाजार के कुछ क्षेत्र अंग्रेजों के समय में विकसित श्रेणी में आते थे. अतिथि विश्राम गृह से लेकर सेल्टर, वाहन पार्किंग, यात्री पड़ाव, पेयजल, शौचालय आदि के इंतजाम उस जमाने में इन बाजारों के विकसित होने का उदाहरण प्रस्तुत करते थे. आज विकास को इतनी गति मिलने के बाद भी बाजारों में इन जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा कर पाने का प्रयास अधूरा रह गया है.
ताजा सब्जियों के लिए शाम में पहुंचते है लोग
शहर के सरकारी बाजार, गुदरी बाजार, सांढ़ा बाजार आदि स्थानों पर शाम में ताजी सब्जियों का बाजार लगता है. लोग अपने कार्यालय से निकलने के बाद खरीदारी के लिए आते है. वहीं महिलाएं भी दिन भर के काम को निबटा शाम में बाजारों में अपने किचेन के लिए ताजी सब्जियां लेने यहां आती है. इसके बाद अक्सर घर वापस जाने के लिए यात्री वाहन के इंतजार में घंटो सड़क किनारे सामान के साथ खड़े रहना पड़ता है.
बाजार की प्रमुख समस्याएं
बाजारों में नहीं है शौचालय
पार्किंग जोन का है अभाव
जल निकासी का नहीं है इंतजाम
यात्री पड़ाव नदारद
साफ-सफाई की नहीं है नियमित व्यवस्था
क्या कहते हैं जिम्मेदार
शहर के प्रमुख बाजारों में बुनियादी सुविधाओं का विकास निगम की प्राथमिकता है. इसके अंतर्गत कई योजनाएं प्रस्तावित है. जिन पर जल्द ही काम शुरू होना है. बाजारों में पार्किंग, यात्री पड़ाव आदि की सुविधाएं बहाल की जायेंगी.
संजय कुमार उपाध्याय, नगर आयुक्त, नगर निगम, छपरा
सर्वाधिक राजस्व देते हैं गुदरी और सरकारी बाजार
शहर के गुदरी व सरकारी बाजार की प्रसिद्धि ग्रामीण इलाकों तक फैली हुई है. आज भी ग्रामीण क्षेत्र के लोग इन्हीं बाजारों से अधिकतर सामानों की खरीदारी करते है.
दोनों बाजारों में करीब 2500 से भी अधिक छोटी-बड़ी दुकानें है, जिनके माध्यम से करोड़ों का राजस्व निगम को प्राप्त होता है. इसके बाद भी बरसात हो या सामान्य दिन इन बाजारों की सड़कों पर नाले का पानी बहता रहता है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था बाजारों में नहीं है. कई बार निगम में यह मुद्दा जोर-शोर से हावी रहा. लेकिन समाधान को लेकर सार्थक प्रयास नहीं किया गया.
बाजार की प्रमुख समस्याएं
बाजारों में नहीं है शौचालय
पार्किंग जोन का है अभाव
जल निकासी का नहीं है इंतजाम
यात्री पड़ाव नदारद
साफ-सफाई की नहीं है नियमित व्यवस्था
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