गंगा के कटावों ने लीले नीलही कोठियों के अवशेष

मोहनपुर : मोहनपुर उस जमाने में पता नहीं किस नाम जाना जाता रहा होगा, गांव भी रहा होगा या नहीं. यदि गांव रहा होगा, तो आबादी कम रही होगी, लेकिन आज के मोहनपुर प्रखंड से जो कुछ गंगा के तटवर्ती गांव पंचायतों के रूप में जुड़े हैं. वहां नीलहे साहबों की कोठियों से लेकर नील […]
मोहनपुर : मोहनपुर उस जमाने में पता नहीं किस नाम जाना जाता रहा होगा, गांव भी रहा होगा या नहीं. यदि गांव रहा होगा, तो आबादी कम रही होगी, लेकिन आज के मोहनपुर प्रखंड से जो कुछ गंगा के तटवर्ती गांव पंचायतों के रूप में जुड़े हैं. वहां नीलहे साहबों की कोठियों से लेकर नील की खेती के प्रमाण हाल तक मिलते रहे हैं. करीब पांच दशक पूर्व तक नील की खेती के बाद उसके प्रसंस्करण के लिए बनाये गये हौजों के अवशेष जीवित थ़े फणीश्वरनाथ रेणु की कथाओं में जिन नीलही कोठियों की चर्चा हुई, वैसी कोठियां आज के मोहनपुर प्रखंड के कई गांवों में थीं. कथाओं में इन कोठियों से जुड़ीं घटनाओं का उद्धार नहीं हो पाया़
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