सरकारी विभागों पर 1024. 26 लाख बकाया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Mar 2017 4:47 AM (IST)
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समस्तीपुर : सरकारी विभाग बिजली का इस्तेमाल करने में सबसे आगे हैं. जिले में कई ऐसे सरकारी कार्यालय हैं जिन पर लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया है. विद्युत विभाग के बार-बार नोटिस भेजने के बाद भी इन विभागों ने बिल नहीं चुकाये हैं. बड़े बकायेदार होने के बाद भी सरकारी कार्यालयों में बिजली की […]
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समस्तीपुर : सरकारी विभाग बिजली का इस्तेमाल करने में सबसे आगे हैं. जिले में कई ऐसे सरकारी कार्यालय हैं जिन पर लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया है. विद्युत विभाग के बार-बार नोटिस भेजने के बाद भी इन विभागों ने बिल नहीं चुकाये हैं.
बड़े बकायेदार होने के बाद भी सरकारी कार्यालयों में बिजली की आपूर्ति जारी है. आम आदमी पर बिजली विभाग का थोड़ा ही बकाया हो तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है, लेकिन सरकारी विभाग तो लाखों रुपये के कर्जदार हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है़ नाॅर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एमडी ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों पर विद्युत मद में बकाया राशि 1213. 48 लाख रुपये लंबित हैं.
इस राशि के विरुद्ध सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा 286. 25 लाख रुपये आवंटन पत्र निर्गत किये जा चुके हैं, जिसमें 189. 22 लाख रुपये की वसूली नहीं हो पायी है. एमडी ने 1024. 26 लाख रुपये बकाया की राशि संबंधित विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों से भुगतान करवाने के लिए भी आग्रह किया है़ साथ ही कहा कि भुगतान नहीं होने की स्थिति में कनेक्शन को डिस्कनेट करने की बाध्यता होगी.
बकायेदारी में लघु सिंचाई विभाग अव्वल : पुलिस, स्वास्थ्य महकमा, पीडब्ल्यूडी समेत तमाम विभाग बिल की बकायेदारी को लेकर एक दूसरे को पछाड़ रहे हैं. इससे बकायेदारों की एक लंबी लिस्ट बन गयी है.
लघु सिंचाई विभाग पर जहां 649. 95 रुपये बकाया हैं, तो नगर विकास विभाग पर 223. 80 लाख की बकायेदारी है़ इसके अलावा भी कई अन्य विभाग लाख का आंकड़ा छू चुके हैं. पीएचइडी पर 122.85, सिंचाई विभाग पर 15. 44, स्वास्थ्य महकमा पर 24, पुलिस महकमा पर 3.16, पीडब्ल्यूडी भवन पर 45, कृषि विभाग पर 21. 60, उच्च शिक्षा विभाग पर 4. 47, प्राथमिक शिक्षा पर 73. 19 लाख रुपये बकाया है़
31 मार्च को काम नहीं करेंगे वकील : समस्तीपुर. सरकार के इशारे पर विधि आयोग द्वारा अधिवक्ता अधिनियम 1961 में फेरबदल कर अधिवक्ताओं के अधिकार व एसोसिएशन के अधिकार छीनने की साजिश रची जा रही है. साजिश को विफल करने को लेकर बार काउंसिल आॅफ इंडिया के निर्देश पर देश के लाखों अधिवक्ताओं के साथ जिले के अधिवक्ता भी 31 मार्च को अपने को न्यायिक कार्य से अलग रखेंगे.
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रजनी रंजन ने बताया कि शुक्रवार को सदस्य वित्तीय आयोग के प्रतिवेदन की प्रति को परिसर में जलाकर अपना विरोध प्रकट करेंगे व अपने को न्यायिक कार्य से अलग रखेंगे. उन्होंने कहा कि विधि आयोग के प्रतिवेदन के अनुसार अधिवक्ताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार केंद्र व प्रदेश सरकारों के हाथों में चला जायेगा. साथ ही वकीलों के निबंधन को रद्द करने का अधिकार न्यायिक पदाधिकारियों के हाथ में चला जायेगा. उन्होंने कहा कि वकीलों की मूलभूत सुविधाओं में भी कटौती करने का प्रस्ताव विधि आयोग ने लिया है, जो गैर कानूनी है.
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