बेसिक फोन के राजस्व में नौ लाख की कमी

Published at :19 May 2016 5:25 AM (IST)
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बेसिक फोन के राजस्व में नौ लाख की कमी

समस्तीपुर : बीएसएनएल की संरचना में सबसे अहम कड़ी माने जाने वाली लैंडलाइन समस्याओं से उबरने का नाम नहीं ले पा रही है. कभी बीएसएनएल के राजस्व में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी. वहीं अब इसका आंकड़ा नीचे की तरफ गिरने लगा है. वित्तीय वर्ष 14-15 के मुकाबले 15-16 में लैंडलाइन से राजस्व की प्राप्ति […]

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समस्तीपुर : बीएसएनएल की संरचना में सबसे अहम कड़ी माने जाने वाली लैंडलाइन समस्याओं से उबरने का नाम नहीं ले पा रही है. कभी बीएसएनएल के राजस्व में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी. वहीं अब इसका आंकड़ा नीचे की तरफ गिरने लगा है. वित्तीय वर्ष 14-15 के मुकाबले 15-16 में लैंडलाइन से राजस्व की प्राप्ति में नौ लाख की कमी दर्ज हुई है.

वित्तीय वर्ष 14-15 में इससे 73 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था. वहीं वित्तीय वर्ष 15-16 में गिरकर यह मात्र 64 लाख ही रह गया है. वहीं उपभोक्ताओं की संख्या भी सीमट कर 3500 ही रह गयी है, जिसमें अधिकांश सरकारी कार्यालयों में ही अवस्थित थे. हालांकि, बेसिक फोन के मुकाबले आधे से अधिक राजस्व में पोस्टपेड मोबाइल भूमिका निभा रही है. 500 ग्राहकों से इस वर्ष 45 लाख की आय बीएसएनएल को प्राप्त हुई है.
इसी तरह ब्राॅडबैंड के 1200 ग्राहकों से 96 लाख का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है. इसी तरह डब्ल्यूएलएल के 310 ग्राहकों से तीन लाख व वाइमैक्स सेवा से बीएसएनएल को 34 लाख का राजस्व वित्तीय वर्ष 15-16 में प्राप्त हुआ है. बता दें कि बीएसएनएल की खराब नेटवर्क की समस्या ने इसके ग्राहकों को परेशान कर रखा है. हालांकि, विभाग का कहना है कि रोजाना सड़क निर्माण में केबुल कट जाते हैं. इसके कारण बेसिक फोन पर इसका गलत प्रभाव पड़ रहा है.
पंद्रह साल पुराने कंप्यूटर के सहारे विभागीय सेवा, बीएसएनएल की जिला दूरसंचार केंद्र अपने कंप्यूटरों के कारण समस्या झेल रही है. पंद्रह साल पुराने सिस्टम के भरोसे आज के दौर के टेलीफोन ऑपरेटरों से इन्हें प्रतिस्पर्धा करना पड़ रहा है. रह रहकर सिस्टम में खराबी विभागीय कर्मचारियों को परेशान करती रहती है. कुछ कर्मचारी अपने खुद का सिस्टम लाकर काम कर रहे हैं. इससे पहले बीएसएनएल को कंप्यूटरों की खेप 2001 में ही दी गयी थी. इसके बाद इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. वहीं कर्मचारियों का कहना है कि इस बाबत मुख्यालय को बार बार मांग प्रतिवेदन भेजा गया है. मगर हालात जस की तस है.
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