नियोजित शिक्षकों को झटका लगने पर एचएम व अन्य प्रभारों से दे रहे इस्तीफा

Updated at : 16 May 2019 1:18 AM (IST)
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नियोजित शिक्षकों को झटका लगने पर एचएम व अन्य प्रभारों से दे रहे इस्तीफा

समस्तीपुर : सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियोजित शिक्षकों के समान काम के समान वेतन की मांग पर हाई कोर्ट के निर्णय को निरस्त करने के बाद नियोजित शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है. तमाम नियोजित शिक्षक सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न मंचों पर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. न्यायालय के इस फैसले पर अपना विरोध जताते […]

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समस्तीपुर : सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियोजित शिक्षकों के समान काम के समान वेतन की मांग पर हाई कोर्ट के निर्णय को निरस्त करने के बाद नियोजित शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है. तमाम नियोजित शिक्षक सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न मंचों पर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. न्यायालय के इस फैसले पर अपना विरोध जताते हुए पटोरी प्रखंड के रा. मध्य विद्यालय गोरगामा के प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार पांडेय ने अपने को प्रधानाध्यापक के पद से मुक्त करने के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन दिया है.

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को लिखे पत्र में प्रभारी एचएम ने बताया है कि माननीय उच्च न्यायालय में नियोजित शिक्षकों के पक्ष को सुनने के बाद समान काम के लिए समान वेतन देने का फैसला दिया था. जिसके बाद सरकार नियोजित शिक्षकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई. सात महीने के लंबे अंतराल के बाद 10 मई को फैसला सुनाया गया. तो नियोजित शिक्षक काफी मायूस हो गए. जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के युवा नेता सिद्धार्थ शंकर ने कहा सुप्रीम कोर्ट से ऐसी उम्मीद नहीं थी. समान काम समान वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट से नियोजित शिक्षकों से झटका लगने के बाद नियोजित शिक्षक भी सरकार से लड़ाई के लिए आर-पार के मूड़ में हैं.

सम्मान बचाने के लिए छोड़ा एचएम का प्रभार : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन के उपयुक्त नहीं समझा. ऐसे में तमाम शिक्षक अपने तरीके से इस फैसले का विरोध जता रहे हैं. वहीं रा. मध्य विद्यालय गोरगामा के अन्य नियोजित शिक्षक मो. रिजवान अकरम व मधु कुमारी का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट नियोजित शिक्षकों को इस लायक नहीं समझता कि उन्हें नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जाए,
तो फिर उन्हें विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना तथा प्रभारी प्रधानाध्यापक पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है. ऐसे में उन्होंने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद से मुक्त करने का आवेदन दिया है. ताकि वह एक सामान्य शिक्षक के रूप में बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें.
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