स्वाद में मिलावट, सेहत से खिलवाड़
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 May 2016 12:07 AM (IST)
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परेशानी. मिलावटी मसाला से पटा हुआ है सहरसा का बाजार, रहें सावधान इन दिनों स्थानीय बाजारों में मिलावट का धंधा धड़ल्ले से जारी है. मसालों में मिलावट कर दुकानदारों ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन यह हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है. सहरसा नगर : स्थानीय बाजार में इन दिनों मिलावटी […]
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परेशानी. मिलावटी मसाला से पटा हुआ है सहरसा का बाजार, रहें सावधान
इन दिनों स्थानीय बाजारों में मिलावट का धंधा धड़ल्ले से जारी है. मसालों में मिलावट कर दुकानदारों ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन यह हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है.
सहरसा नगर : स्थानीय बाजार में इन दिनों मिलावटी मसालों की खूब बिक्री हो रही है. नकली मसाला खुला व पाउच दोनों प्रकार में उपलब्ध है. शहरी व ग्रामीण दोनों इलाके में ग्राहक नकली मसाला के सेवन से बीमारियों को आमंत्रण दे रहे हैं. इन मसालों की बिक्री कर दुकानदार भी मालामाल हो रहे हैं. ज्ञात हो कि सामान में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए व्यापारी कुछ ऐसे सस्ते तत्वों की मिलावट करते हैं, जो हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है.
इन मिलावटी तत्वों से कैंसर, दिमाग की बीमारी, नर्व तंत्र खराब होना, नपुंसकता, त्वचा रोग, एलर्जी, नवजात बच्चों की मृत्यु और महामारी जैसी घातक बीमारियां हो जाती है. कभी कभी घातक मिलावटी तत्व खेत से ही मिले हुए आ जाते हैं और व्यापारी उसको अलग नहीं करवाते. मेहनताना बचाने के लिए इन लोगों द्वारा ग्राहकों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है. फेस्टिव सीजन हो या नॉर्मल, बाजार में मिलावटी चीजों का मिलना आम हो गया है.
ये मिलावट इतनी बारीकी से की जाती है कि असली खाद्य पदार्थ और मिलावटी चीजों में अंतर कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि इसका बुरा असर हमारी सेहत पर पड़ने लगा है. मसाला के अलावा दूध, चाय की पत्ती, सेब, मटर, आटा जैसी चीजों में भी व्यापारी मिलावट कर रहे हैं. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हमें यह मालूम हो कि हम जो खा रहे हैं, वह शुद्ध है भी या नहीं. आइए जानते हैं कैसे-कैसे मिलावट की जाती है, आप खुद पहचान कर इन चीजों से तौबा कर सकते हैं.
कहते हैं चिकित्सक
डॉ विमल कुमार कहते हैं कि भारत में 52 प्रतिशत बीमारी मिलावटी तत्वों के सेवन से होती है. उन्होंने बताया कि कैसिया बार्क यानी चीन की दालचीनी में कौमारिन की मात्रा ज्यादा होती है. इससे लीवर पर गलत प्रभाव पड़ता है. व्यापारी ज्यादा मुनाफे के लिए रंगे हुए बुरादे की मिलावट हल्दी पाउडर में कर देते है. खाने में इसके उपयोग से कैंसर हो सकता है.
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