बस स्टैंड: जहां परेशानी सिर चढ़ कर बोलती है...

Published at :18 Dec 2015 6:35 PM (IST)
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बस स्टैंड: जहां परेशानी सिर चढ़ कर बोलती है...

बस स्टैंड: जहां परेशानी सिर चढ़ कर बोलती है… प्रभात खाससिर्फ टैक्स वसूली करती है नगर परिषदयात्री सुविधा नदारद, फिर भी होती है वसूलीबरसात के समय नरक बन जाता है मुख्य बस पड़ावसहरसा नगरऐसी कोई जगह नहीं जहां आप गंतव्य तक पहुंचाने वाले बस का इंतजार कर सकें. अपने परिजनों को बस तक पहुंचाने की […]

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बस स्टैंड: जहां परेशानी सिर चढ़ कर बोलती है… प्रभात खाससिर्फ टैक्स वसूली करती है नगर परिषदयात्री सुविधा नदारद, फिर भी होती है वसूलीबरसात के समय नरक बन जाता है मुख्य बस पड़ावसहरसा नगरऐसी कोई जगह नहीं जहां आप गंतव्य तक पहुंचाने वाले बस का इंतजार कर सकें. अपने परिजनों को बस तक पहुंचाने की ख्वाहिश है तो वह भी अधूरी रह जायेगी. आपकी बस पटना जाती हो या पूर्णिया या फिर आसपास के गांवों में पार्किंग कीचड़मय गड्ढे में ही करनी होगी. यह किसी कहानी के संवाद नहीं, कोसी प्रमंडल के मुख्यालय में गंगजला चौक स्थित मुख्य बस स्टैंड की सच्चाई है. रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है. इसके बावजूद रेलवे की जमीन पर कर वसूली करने वाली संस्था नगर परिषद सुविधा मुहैया कराने की बजाय उदासीन रहती है. हद तो यह है कि यहां प्रकाश की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गयी है. जबकि बस स्टैंड को अन्यत्र ले जाने की बात अब हवा हवाई लगने लगी है. स्टैंड में खराब होती है बसयूं तो सूबे की प्रमुख सड़कों सहित एनएच व एसएच सपाट बन चुकी है. लेकिन बस स्टैंड की बदहाली भी किसी से छुपी हुई नहीं है. बस आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिवाकर सिंह कहते हैं कि बरसात के दिनों में स्टैंड दलदल बन जाता है. गाड़ी अपने नंबर के इंतजार में घंटों खड़ी रहती है. जिससे गाड़ी के नीचे का हिस्सा सड़ने लगता है. सफाई तो होती ही नहींसुव्यवस्थित बस पड़ावों पर संबंधित विभाग द्वारा पर्याप्त संख्या में प्लेटफार्म बना दिये जाने की वजह से गाडि़यां जमीन के संपर्क से उपर खड़ी रहती है. लेकिन शहर के इस मुख्य बस पड़ाव पर गंदगी के बीच बस खड़ी रहती है. चालक बताते है कि बस का दरवाजा खुला रहने पर चूहा प्रवेश कर जाता है. उन्होंने बताया कि नगर परिषद द्वारा स्टैंड की सड़कों पर सिर्फ झाड़ू दिया जाता है, लेकिन कभी भी परिसर के अंदर झाड़ू या सफाई नगर परिषद नहीं करवाती है. यात्री शेड है नशेडि़यों का ठिकानाबस पड़ाव स्थित यात्री शेड निर्माण के कुछ दिन बाद ही जर्जर हो गयी थी. शेड में रात के समय लोग मलमूत्र त्याग करने से भी नहीं चुकते हैं. इसके अलावा नशेड़ी किस्म के लोग सुबह से ही शेड के अंदर जमा होने लगते है. इस वजह से यात्रियों को सड़क किनारे धूप व बरसात का सामना करना पड़ता है. खड़ी बस के पीछे करते हैं पेशाबघंटों बस का सफर कर पहुंचने वाले यात्री हो या वाहन चालक उन्हें प्रेशर आने पर बस की ओट में पीछे ही जाना होता है. ज्ञात हो कि स्टैंड पर बने शौचालय तक पहुंचने क साफ-सुथरा मार्ग तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. लोगों को गंदे नालों व कीचड़मय रास्ते से ही जाना होता है. शौचालय की तरफ बढ़ने वाले यात्री गंदगी देख लौट जाते है. महिलाओं को तो काफी फजीहत झेलनी पड़ती है. फोटो-बस 9 व 10- जर्जर बस पड़ाव व कचरों के बीच खड़ी बसें

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