धर्मगुरु और यूनिसेफ बिहार राज्य में बाल अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए हुए एकजुट
Edited by Prabhat Khabar News Desk
Updated:
विज्ञापन
यूनिसेफ द्वारा बच्चों के संरक्षण एवं सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों हक, सुरक्षा, उनके विकास में भागीदारी पर अलग-अलग धर्म एवं आस्था गुरुओं की परिचर्चा आयोजित करायी गयी.
विज्ञापन
संवादाता,पटना
यूनिसेफ द्वारा बच्चों के संरक्षण एवं सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों हक, सुरक्षा, उनके विकास में भागीदारी पर अलग-अलग धर्म एवं आस्था गुरुओं की परिचर्चा आयोजित करायी गयी. परिचर्चा में 2017 में यूनिसेफ द्वारा शुरू किये गये बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन को पुनर्जीवित किया गया. यह विश्व महामारी कोविड-19 के कारण शिथिल हो गया था. बिहार में बाल अधिकारों को बढ़ावा विषय पर आयोजित कार्यक्रम में 20 से अधिक धार्मिक / आस्था-आधारित संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इनके साथ-साथ मीडिया एवं यूनिसेफ के अधिकारी भी चर्चा में शामिल हुए. परिचर्चा में बाल सुरक्षा एवं कल्याण, स्वास्थ्य, भरण-पोषण, शिक्षा एवं बाल-विवाह विषय पर चर्चा की गयी. साथ ही सुझाव साझा किया गया कि धार्मिक शिक्षाओं द्वारा इन सारे विषयों की जानकारी लोगों को दी जानी चाहिए. इसके अलावा आस्था संस्थाएं वर्तमान में बच्चों के अधिकारों और कल्याण के लिए क्या प्रयास कर रही हैं. आगे इन क्षेत्रों में किस प्रकार से काम करने के साथ-साथ अन्य समुदाय और संस्थाओं का सहयोग कैसे लिया जा सकता है पर चर्चा की गयी. बिहार यूनिसेफ की प्रमुख मार्गरेट ग्वाडा ने अपने संबोधन द्वारा भारत में यूनिसेफ के सफल 75 साल की यात्रा का जिक्र किया.मार्गेरेट ने बताया कि धर्मगुरु और उनकी संस्थाएं किस प्रकार से हमेशा यूनिसेफ़ के सुदृढ़ सहयोगी रहे हैं. ग्वाडा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किस तरह से हम लोगों ने मिलकर देश को पोलियो मुक्त किया और कैसे विश्व महामारी कोविड-19 से जंग जीती.यूनिसेफ़ बिहार प्रमुख ने कहा कि इस परिचर्चा द्वारा हमें हमारे कार्यों को समन्वित करने के लिए कैसी रणनीति तैयार करनी है, उसमें काफी मदद मिलेगी. धर्मगुरु जो पैनल चर्चा में प्रो डाॅ सैयद शाह शमीम अहमद, मुफ्ती सोहराब नदवी कासमी, मोहम्मद शहजाद, सिस्टर मोनिका मैनुएल और सिस्टर रीटा, सिस्टर दीपिका, फादर अमल राज, आचार्य किशोर कुणाल, बीके सरिता, ब्रह्मकुमारी, डाॅ एसके परिडा, आलोक कुमार अग्रवाल और प्रज्ञा अग्रवाल, दिलीप सिंह एवं विजय कुमार जैन शामिल हुए. धर्म गुरुओं ने कहा कि बच्चों और किशोरों के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में धार्मिक प्रवचन और उपदेशों में उनके मुद्दों पर बात करने की जरूरत है.बच्चे अधिकार धारक हैं, लेकिन अधिकारों का प्रयोग माता-पिता के माध्यम से किया जाता है, इसलिए धर्म गुरुओं ने बच्चों और किशोरों की जरूरतों, सुरक्षा, अधिकारों और समग्र सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए माता-पिता को प्रशिक्षित करने की सलाह दी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










