हाइकोर्ट : बीसीआइ सभी 27 लॉ कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षक और प्राचार्य की शैक्षणिक योग्यता अगली सुनवाई में प्रस्तुत करे

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Apr 2024 12:21 AM

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य स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने बीसीआइ को कहा कि वह अगली सुनवाई में सभी 27 लॉ काॅलेजों के संबंध में विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करे.

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पटना.राज्य में स्थित सभी सरकारी और निजी लॉ कालेजों की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने बीसीआइ को कहा कि वह अगली सुनवाई में सभी 27 लॉ काॅलेजों के संबंध में विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करे. कोर्ट ने कहा कि इन काॅलेजों में जो भी शिक्षक पढ़ाते हैं या प्राचार्य कार्यरत हैं उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है. क्या वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं. इसकी पूरी जानकारी हाइकोर्ट को अगली सुनवाई पर उपलब्ध करायी जाये. मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने इस मामले को लेकर कुणाल कौशल द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. हाइकोर्ट ने कहा कि अगर किसी लॉ कॉलेज द्वारा अपने कमियों को बीसीआइ के मानक के अनुसार सुधार कर ठीक कर लिया जाता है , तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया वैसे कॉलेज को सत्र 2024- 25 के नामांकन के लिए अनुमति दे सकती है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे लॉ कॉलेज बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने के बाद भी चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि इन लॉ काॅलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी बीसीआइ द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है. पीएचडी की डिग्री उन शिक्षकों के लिए आवश्यक है,लेकिन इन लॉ कालेजों में इसका पालन नही किया जा रहा है. इसके पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने जानना चाहा था कि बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा किये बगैर बहुत से लॉ कालेजों में छात्रों का एडमिशन कैसे लिया जा रहा है . हाइकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह में सभी 27 लॉ काॅलेजों के संबंध में विस्तृत ब्योरा कोर्ट में पेश करे . कोर्ट ने जानना चाहा था कि क्या ये लॉ कॉलेज बीसीआइ द्वारा लॉ की पढ़ाई के लिए निर्धारित मानकों को पूरा कर रहे हैं ? वहां क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे लॉ कॉलेज बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने के बाद भी चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि इन लॉ कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी बीसीआइ द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है.पीएचडी की डिग्री उन शिक्षकों के लिए आवश्यक है,लेकिन इन लॉ कालेजों में इनका पालन नहीं किया जा रहा है. इस पर कोर्ट ने जानना चाहा कि बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा किये बगैर बहुत से लॉ कालेजों में छात्रों का एडमिशन कैसे लिया जा रहा है . सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर कोई लॉ काॅलेज बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है तभी उन कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन होना चाहिए. हाइकोर्ट का कहना था कि जो लॉ कॉलेज बीसीआइ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है उन कालेजों में ही लॉ की पढ़ाई होनी चाहिए. अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति काफी खराब है. इन कालेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. बहुत सारे लॉ कॉलेज बीसीआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते है.इस कारण उन कालेजों में उच्च स्तरीय लॉ की पढ़ाई नहीं होती है.

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