नवंबर से उड़ने लगेंगे दरभंगा एयरपोर्ट से यात्री विमान, उत्तर बिहार के लोगों को मिलेगा फायदा

पटना: दरभंगा एयरपोर्ट के सिविल एनक्लेव का निर्माण तेजी से चल रहा है. यहां यात्रियों के आने जाने के लिए पोर्टा केबिन के इस्तेमाल से 40 मीटर लंबे और 30 मीटर चौड़े टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है जो कुल 1200 वर्गमीटर में फैला है. इसमें एक समय में 150 यात्री अच्छी तरह से एकोमोडेट हो सकते हैं, जिनमें 75 एराइवल और 75 डिपार्चर एरिया में रह सकते हैं.
पटना: दरभंगा एयरपोर्ट के सिविल एनक्लेव का निर्माण तेजी से चल रहा है. यहां यात्रियों के आने जाने के लिए पोर्टा केबिन के इस्तेमाल से 40 मीटर लंबे और 30 मीटर चौड़े टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है जो कुल 1200 वर्गमीटर में फैला है. इसमें एक समय में 150 यात्री अच्छी तरह से एकोमोडेट हो सकते हैं, जिनमें 75 एराइवल और 75 डिपार्चर एरिया में रह सकते हैं.
इस प्रकार यहां से 76 सीट वाले छोटे एटीआर विमानों के साथ साथ 180 सीट वाले बोईग 737 या एयरबस 320 का परिचालन भी किया जा सकता है. पोर्टा केबिन बन जाने के बाद उसमें लाइट और एसी समेत यात्रियों के लिए जरुरी विभिन्न सुविधाओं को लगाने का काम चल रहा है और पूरे प्रोजेक्ट पर कुल 75 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. नवंबर मध्य तक काम पूरा हो जायेगा और यहां से यात्री विमानों का परिचालन शुरू हो जायेगा. शुरूआत में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू के लिए यहां से सीधी फ्लाइट जायेगी और स्पाइसजेट ने इसके लिए पहले से ही एयरपोर्ट ऑथोरिटी की सहमति ले रखी है.
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टर्मिनल भवन के पास ही एक पार्किंग का भी निर्माण किया जाना है, जहां यात्रियों को एयरपोर्ट तक लाने और ले जाने वाले वाहन खड़े होंगे. इसकी क्षमता 30 कारों की होगी. जलजमाव के कारण अभी यह काम नहीं शुरू हुआ है. बारिश का मौसम खत्म होने और जमे जल के बाहर निकलने के बाद अक्तूबर में इसका निर्माण होगा.
दरभंगा एयरपोर्ट मूलत: वायुसेना का बेस स्टेशन है जिसे एयरपोर्ट ऑथोरिटी से हुए एक समझौते के बाद यात्री विमानों के परिचालन के लिए खोला गया है. राज्य सरकार ने सिविल एनक्लेव बनाने के लिए यहां एयरपोर्ट ऑथोरिटी को 2.5 एकड़ जमीन दिया है. साथ ही यात्री विमानों की जरूरतों के अनुरूप पुराने रनवे की जगह चार लेयर वाले 2590 मीटर लंबे नये रनवे के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है. लेकिन इसमें से पहला लेयर ही अब तक बन कर पूरी तरह तैयार हो सका है. दूसरे लेयर के 1000 मीटर का निर्माण बाकी ही था कि बारिश और जलजमाव के कारण 10 जून से काम बंद हो गया है.
पिछले वर्ष के अनुभव को देखें तो अक्तूबर मध्य के पहले बारिश समाप्त भी नहीं होगी. ऐसे में नवंबर मध्य तक केवल रनवे के दूसरे लेयर का निर्माण पूरा हो सकेगा और उसी पर विमानों का लैंडिंग और टेकऑफ शुरू कर दिया जायेगा. तीसरे और चौथे लेयर का निर्माण विमानों के परिचालन के साथ ही जारी रहेगा और अगले चार-पांच महीने में पूरा होगा.
Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya
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