नीतीश कुमार अतिपिछड़ों के सबसे बड़े हितैषीः राजीव रंजन

Published at :30 Apr 2024 1:43 AM (IST)
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नीतीश कुमार अतिपिछड़ों के सबसे बड़े हितैषीः राजीव रंजन

पटना़ .जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अति पिछड़ों के सबसे बड़े हितैषी हैं. सोमवार को बड़हिया में शीतला माता मंदिर के पास नीम के पेड़ के नीचे अतिपिछड़ा समाज की बैठक राजीव रंजन के साथ अखिल भारतीय धानुक महासंघ के अध्यक्ष शंकर प्रसाद, दीपक महतो, गंगा साव, सुरेश ठाकुर, चंद्रकला देवी, शांता देवी, मंजू देवी समेत दर्जनों लोगों की मौजूदगी रही.

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पटना़ .जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अति पिछड़ों के सबसे बड़े हितैषी हैं. सोमवार को बड़हिया में शीतला माता मंदिर के पास नीम के पेड़ के नीचे अतिपिछड़ा समाज की बैठक राजीव रंजन के साथ अखिल भारतीय धानुक महासंघ के अध्यक्ष शंकर प्रसाद, दीपक महतो, गंगा साव, सुरेश ठाकुर, चंद्रकला देवी, शांता देवी, मंजू देवी समेत दर्जनों लोगों की मौजूदगी रही. चिलचिलाती धूप व तेज गर्मी के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं रही. इस मौके पर उपस्थित सभी लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों में आस्था जताते हुए तन-मन से उनका साथ देने का संकल्प लिया. इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि आज की तारीख में गरीबों, पिछड़ों और अतिपिछड़ों का नीतीश कुमार से बड़ा हितैषी और कोई नहीं है. बिहार के गरीबों को 75 प्रतिशत का आरक्षण देकर उन्होंने इस बात को साबित किया है कि वह जो कहते हैं उसे हर हाल में पूरा करते हैं. उन्होंने कहा कि वास्तव में कर्पूरी ठाकुर के बाद नीतीश कुमार पहले ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने अतिपिछड़े समाज के लिए ताल ठोक कर काम किया है. 1975 में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में अतिपिछड़ा समाज को पहली बार सरकारी नौकरियों में 12 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिला था. उनके बाद नीतीश कुमार ने ही इस समाज के तेज विकास के लिए उनके आरक्षण को बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया. इतना ही नहीं बल्कि अतिपिछड़ा समाज की नेतृत्व क्षमता को निखारने के लिए उन्होंने नगर निकायों व पंचायतों में भी हमारे समाज को 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया. अब आरक्षण का दायरा बढ़ा कर उन्होंने बिहार के दलितों, पिछड़ों-अतिपिछड़ों समेत समाज के हर वर्ग के गरीबों के लिए विकास के नए द्वार खोल दिये हैं. इतिहास में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा.

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