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पटना एम्स छोड़कर जाने को मजबूर हुए डॉक्टर, विभागों में सुविधाओं की कमी, मरिजों के हाथ लगी निराशा

एक दशक पूरे हो जाने के बाद भी पटना एम्स में सभी विभाग कार्यरत नहीं हैं. सभी विभागों की चिकित्सकीय सुविधाएं इतने बड़े अस्पताल में नहीं मिलने से राज्य के मरीजों में निराशा है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
पटना एम्स
पटना एम्स
File

पटना के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक एम्स की स्थापना 2012 में की गई थी. जिसके बाद से एम्स एक दशक से राज्य की जनता को अपनी सेवा दे रहा है. वहीं सुपर स्पेशियलिटी विभागों की सुविधा 2017 से मिलनी शुरू हुई थी. अभी तक चार सुपर स्पेशियलिटी विभागों की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी है बीच में न्यूरोलॉजी और हेमेटोलॉजी विभाग की सुविधा बहाल हुई थी पर चिकित्सक एम्स छोड़कर दूसरे अस्पताल चले गए. इन सुपर स्पेशियलिटी विभागों में न्यूरोलॉजी, हेमेटोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग शामिल है. लेकिन बड़ी दुख की बात यह है कि इन सुपर स्पेशियलिटी विभागों में चिकित्सक ही नहीं है.

विभागों में अब तक नहीं हो सकी चिकित्सकीय सुविधा बहाल

एम्स में डॉक्टर की कमी की वजह से विभागों में चिकित्सकीय सुविधा अभी तक बहाल नहीं हो सकी है. पटना एम्स में चिकित्सकों के लिए 305 पद स्वीकृत हैं जबकि अभी यहां वर्तमान में सिर्फ 135 चिकित्सक कार्यरत हैं. चिकित्सकों की भारी कमी है . ओपीडी से लेकर ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी की भी सुविधा बहाल की गई हैं. लेकिन लगभग एक दशक पूरे हो जाने के बाद भी यहां सभी विभाग कार्यरत नहीं हैं. खासकर हेमेटोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी का सुपर स्पेशियलिटी विभाग और सुपर स्पेशियलिटी विभाग रोलॉजी अबतक कार्यरत नहीं हो पाया है सभी विभागों की चिकित्सकीय सुविधाएं इतने बड़े अस्पताल में नहीं मिलने से राज्य के मरीजों में निराशा ही निराशा है एम्स के हर कार्यरत विभागों के ओपीडी में मरीजों की भीड़ है.

मरीजों को मिलती है निराशा 

यदि इन चार विभागों में चिकित्सक होते तो यहां भी मरीज की भीड़ रहती एम्स में मरिज एक उम्मीद लेकर आते हैं लेकिन जिस उम्मीद से मरीज आते हैं विभाग में सुविधा नहीं होने के वजह से उन्हें फौरन निराश होकर लौट जाना पड़ता है और दूसरे जगह इलाज कराना उनकी मजबूरी बन जाती है. मरीज को लगता है कि एम्स में जो चिकित्सकीय सुविधा हैं वह विशेषज्ञता वाली है. इसी लालच में मरीज बहुत दुर दुर से इलाज के लिए आते हैं और इलाज का इंतजार करते हैं.

संस्थान में 24 घंटे सातों दिन सेवाएं उपलब्ध रहेंगी

इस बीच एम्स में नए निदेशक के पदभार संभालने से मरिजों को एक आशा कि किरण दिख रही है. पुराने निदेशक का कार्यकाल खत्म होने के बाद देवघर एम्स के निदेशक को पटना एम्स का कार्यकारी निदेशक बनाया गया था. नए निदेशक डॉ. गोपाल कृष्ण पाल का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है जल्द ही इन विभागों में फैकल्टी का सेलेक्शन का काम पूरा हो जाएगा फैकल्टी की नियुक्ति होते ही इन चार विभागों की चिकित्सकीय सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी निदेशक ने कहा कि बाकी विभागों में फैकल्टी की कमी है उसकी भी जल्द भरपाई होगी . पटना एम्स नवनियुक्त निदेशक डॉ. गोपाल कृष्ण पाल का कहना है कि संस्थान में मरिजों व डॉक्टरों के बीच 24 घंटे सातों दिन रहकर उनकी समस्याओं को दूर करेंगे. यहां रिसर्च गतिविधि को मजबूत करेंगे. पटना में योगथेरेपी व योग रिसर्च को भी आरंभ करेंगे.

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