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अफसरों को सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाने को करे बाध्य : पटना हाइकोर्ट

Updated at : 21 Feb 2020 7:55 AM (IST)
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अफसरों को सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाने को करे बाध्य : पटना हाइकोर्ट

शिक्षा व्यवस्था : पटना हाइकोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश पटना : पटना हाइकोर्ट ने कहा है कि राज्य के अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते हैं. उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए, तभी राज्य की शिक्षा व्यवस्था को उबारा जा सकता है. हाइकोर्ट की यह टिप्पणी एक याचिका […]

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शिक्षा व्यवस्था : पटना हाइकोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश
पटना : पटना हाइकोर्ट ने कहा है कि राज्य के अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते हैं. उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए, तभी राज्य की शिक्षा व्यवस्था को उबारा जा सकता है. हाइकोर्ट की यह टिप्पणी एक याचिका की गुरुवार को सुनवाई के दौरान आयी. कोर्ट की नाराजगी अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर थी.
डाॅ अनिल कुमार उपाध्याय के एकलपीठ ने कौशल किशोर ठाकुर द्वारा पूर्णिया में अतिथि शिक्षकों को हटाये जाने के मामले में दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि यहां शिक्षा की बदतर स्थिति इसलिए है कि सूबे के सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को राज्य से बाहर पढ़ाते हैं.
जस्टिस उपाध्याय ने राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार से 23 फरवरी तक इस मामलेे में कोर्ट में अपना जवाब देने को कहा है. कोर्ट ने यह बताने को कहा कि राज्य में क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए खासकर गरीबों के बच्चों की खातिर सरकार क्या कर रही है .
शिक्षा व्यवस्था को कैसे वापस पटरी पर लाया जाये, ताकि राज्य का भविष्य जिन करोड़ों बच्चों के कंधों पर है, उनको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके. ऐसा लगता है कि सूबे में कानून का राज एक नारा बन कर रह गया है. इस पर कोई अमल नहीं कर रहा है. राज्य में शिक्षा सबसे खराब हालत में है, फिर भी इसकी सुध किसी को नहीं है.
अफसर अपने बच्चों को बाहर पढ़ाते हैं, इसलिए हालत खराब
बच्चों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ : 20 से अधिक जिलों में नहीं की गयी स्कूली बसों की जांच
पटना : परिवहन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने राज्यभर की स्कूली बसों की जांच करने का निर्देश डीटीओ और एमवीआइ को दिया था. लेकिन 20 से अधिक जिलों में अभियान चला ही नहीं. दिसंबर में कुछ एक जिलों में अभियान चलाया गया. लेकिन, किसी भी स्कूल को नोटिस नहीं किया गया है और न ही किसी बस को चलने से रोका गया. विभाग ने दोबारा सभी जिलों के डीटीओ से स्कूली बसों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है.
परिवहन विभाग के सचिव ने निर्देश दिया था कि स्कूल में चल रही बसों का रजिस्ट्रेशन नंबर, फिटनेस, परमिट, प्रदूषण , जीपीएस, फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी गेट, सीट की क्षमता, अग्निशमन यंत्र की जांच डीटीओ और एमवीआइ करें. जांच में कमी मिलने के बाद संबंधित स्कूलों को नोटिस भेजा जाये. उसके बाद जब कमियों को पूरा कर लिया जायेगा, तो स्कूल बस का परिचालन हो.
फिटनेस जांच करने का दिया गया था निर्देश
विभाग ने निर्देश दिया था कि स्कूल बसों की रैंडम जांच करें और उस वक्त बस में बच्चे नहीं हो. लेकिन, तीन महीने बीतने के बाद भी 20 अधिक जिलों ने विभाग को यह रिपोर्ट नहीं भेजी है कि कितनी स्कूल बसों पर कार्रवाई की गयी है.
अब भी चल रही हैं अनफिट गाड़ियां
परिवहन विभाग के निर्देश के बाद भी पटना सहित अन्य जिलों में अनफिट बसों की संख्या बहुत है, जो खुलेआम चल रही हैं. इनको बड़े आराम से जिला परिवहन कार्यालय से फिटनेस सर्टिफिकेट मिल जाता है. इस दौरान डीटीओ कार्यालय ने एक भी स्कूल को नोटिस नहीं भेजा है. यानी पटना के स्कूलों में चलने वाली सभी गाड़ियां डीटीओ के मुताबिक फिट हैं.
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