पटना में बारिश: हेल्पलाइन नहीं कर रही काम, युवाओं ने संभाली कमान

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मैसेज 1: क्या आप पटना में हैं ! कोई मदद नहीं कर रहा? हिम्मत मत हारिये, हम, यानी बिहार के युवा, हैं आपके साथ. जितना हो पा रहा है, कर रहे हैं. फिलहाल कुछ जगहों पर रुकने का इंतजाम हुआ है, मदद के लिए संपर्क कीजिये. जानकारी के लिए मुझे इस नंबर पर 9636588278 पर संपर्क करें.

मैसेज 2: क्षेत्र के हिसाब से जहां रुकने का इंतजाम हुआ है उनका संपर्क साझा कर रहा हूं. अशोक राजपथ पर सुधीर से 7979900617, गोला रोड में डॉ आकांक्षा 7274939108, एजी कॉलोनी में पुष्य मित्र 7717768938, कंकड़बाग में प्रख्यात से 8210072553 पर, राजेंद्र नगर में सोमू 7004370488, मुस्सलहपुर में दिलीप मेहता 9835212222, बोरिंग रोड में प्रेम से 9123464578, राजा बाजार में रवि रंजन से 8409114379 और केशरी नगर में निर्मल कुमार से 7667901086 नंबर पर संपर्क करें.
मैसेज 3: 10-12 लोगों के रहने की व्यवस्था है, अली राजा हाशमी जी से 8409698786 पर संपर्क कीजिये. स्टेशन रोड, एक्सिबिशन रोड और करबिगहिया में फंसे साथी 9608250407 पर सुमित कुमार जी से संपर्क करें. कुम्हरार, कंकड़बाग, भूतनाथ और भगवान नगर में फंसे है तो 8709301216 पर रवि राज आनंद जी से संपर्क करें. हॉस्टल-पीजी में रहने वाली किसी लड़की को अगर रहने के लिए स्थान चाहिए तो 8789699865 पर अंकिता से संपर्क करें. सुरक्षित ठिकानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, संयम रखें.
बच्चों को दूध व बुजुर्गों को दे रहे दवा
ये चंद मैसेज हैं जिससे सोशल मीडिया पर मदद की पहल हुई. जैसे ही पटना में बाढ़ भयावह हुई, उसके साथ ही राज्य के कुछ युवाओं ने अपने स्तर से मदद करने का प्लान बना लिया. उन्हें पता था कि सरकारी मशीनरी नाकाफी साबित होगी. आपदा बड़ी है तो किसी ने नाव की व्यवस्था करने का फैसला किया तो किसी ने अपने घरों पर रहने की व्यवस्था कर दी. किसी ने अपने स्कूल का दरवाजा खोलने का ऑफर कर दिया तो किसी ने जरूरी सामग्री मसलन सत्तू, पानी, चूड़ा देने का काम किया. इस बीच पटना विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने अपने खाने की सामग्री से खिचड़ी बनायी, मिक्सचर का पैकेट बनाया और उसे लोगों तक पहुंचाया. इसमें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी टीम है. सोमू हैं, सत्यम, सुशांत, डॉ आकांक्षा, निर्मल कुमार, मुकेश हिसारिया, कुमार अरुणोदय, नीरज यादव, राकेश झा, आनंद प्रकाश, अभिषेक और अतुल्य गुंजन. बाढ़ में डूबे शहर के लिए ये लड़के वो कर रहे हैं जो सरकारी मशीनरी नहीं कर पा रही है. बच्चों को दूध, बुजुर्गों को दवाएं, महिलाओं को पानी मुहैया कराने में ये लगे हुए हैं. क्योंकि क्या अस्पताल, क्या स्कूल, पूरा का पूरा शहर डूबा हुआ है और साथ में डूबी हुई है व्यवस्था. जो अगर पहले हो जाती तो आज शहर को बारिश के आगे घुटने नहीं टेकने पड़ते.
हेल्पलाइन नहीं कर रही काम, युवाओं ने संभाली कमान
हेल्पलाइन के नाम पर प्रशासन ने 13 नंबर जारी किये और ये पूरी तरह नाकाम हैं. न तो इन नंबरों पर कोई बात हो रही है और न ही किसी तरह की कोई मदद आ रही है. पुष्यमित्र ने बताया कि ये प्रयास बिहार के युवाओं का है. संगठित प्रयास है ताकि बच्चों-बुज़ुर्गों तक बुनियादी ज़रूरत का सामान पहुंच सके. कम से कम पीने का साफ पानी और दवाएं उन तक पहुंच सकें. सभी युवा इस मुश्किल में लोगों की मदद करना चाहते थे, जो जिस काम आ सके वो कर रहे हैं. जिन इलाकों के नंबर जारी किये गये हैं, अभी वहां तक पानी नहीं पहुंचा है. अगर पानी पहुंचा भी है तो कम है. लोग घरों में ठहर सकते हैं. राशन पानी भी मुहैया कराया जा रहा है.
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