पटना : आशियाना नगर व रामनगरी में सांड़ का आतंक
Updated at : 04 Sep 2019 9:07 AM (IST)
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पटना : मवेशियों के उत्पात से आशियाना नगर के लोग परेशान हैं. इस इलाके के रामनगरी में सांडों के आतंक से लोग डरे रहते हैं. आये दिन सांड किसी न किसी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कभी किसी दुकानदार का समान खा जा रहे हैं तो कभी सड़कों पर चलते राहगीरों को अपना शिकार बना […]
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पटना : मवेशियों के उत्पात से आशियाना नगर के लोग परेशान हैं. इस इलाके के रामनगरी में सांडों के आतंक से लोग डरे रहते हैं. आये दिन सांड किसी न किसी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कभी किसी दुकानदार का समान खा जा रहे हैं तो कभी सड़कों पर चलते राहगीरों को अपना शिकार बना रहे हैं. इलाके के मनोज कुमार ने बताया कि करीब 8 से 10 की संख्या में आवारा सांड घुमते रहते हैं और लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों में डर का माहौल बना हुआ है.
रास्ते में स्कूल या ट्यूशन के लिए निकलने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों में सड़क पर जमें पशुओं को लेकर चिंता बनी हुई है. उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले शक्तिपुरम कॉलोनी के सीपी वर्मा को रामनगरी के पुष्पांजलि अपार्टमेंट के गेट के पास सांड ने धक्का मार दिया था, जिसके बाद अस्पताल में कुछ दिन भर्ती होने के बाद उनकी मृत्यु हो गयी थी. इलाके के लोगों का कहना है कि कुछ खटाल है जो यहां बिना दूध देने वाली गायों और बछड़ा को छोड़ देते हैं जिसके कारण लोग यह परेशानी झेल रहे हैं. प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण भी लोग हादसों के शिकार हो रहे हैं.
सबसे ज्यादा परेशानी शाम के समय में होती है
सांडों की कितनी संख्या है, यह तो पक्का नहीं बता सकता हूं, लेकिन तीन-चार सांडों को तो लगभग सभी लोग पहचानते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी शाम के समय में होती है, उस समय बीच सड़क पर सांड खड़े रहते हैं जिससे जाम भी लगता है. आये दिन किसी न किसी को सांड मार देता है इससे महिलाओं और बच्चों में डर का महौल है.
अविनाश कंठ
इलाके के सभी लोग आवारा सांडों से परेशान हैं. अभी मैं अपने कजन को बस स्टॉप से लाने जा रहा हूं. अकेले स्टॉप से घर आने में भी डरते रहते हैं बच्चे. यही कहूंगा इस समस्या का हल होना चाहिए वर्ना कुछ बड़ा हादसा भी हो सकता है.
विकास कुमार
आवारा पशुओं के द्वारा लोगों को मारने की बात मैंने भी कई बार सुनी है. एक बार तो मेरी बाइक की डिक्की में रखा डॉक्यूमेंट भी आवारा
पशुओं ने बिखेर दिया था. मैं जब वापस अपनी गाड़ी के पास पहुंचा तो पास के दुकानदारों ने बताया कि किसी पशु ने ऐसा किया है.
शिवांश शेखर
आये दिन इन इलाकों में लोगों को सांड मारता ही है. कुछ लोगों को कम चोट लगती है तो किसी को ज्यादा लगती है. कुछ साल पहले मेरी ही दुकान के सामने एक वृद व्यक्ति को सांड ने मारा था. उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गयी थी. यही कहूंगा कि जो भी जिम्मेदार लोग हैं इस ओर भी ध्यान दें.
सतेंद्र कुमार
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