जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल : इलाज को अस्पतालों में भटकते रहे मरीज

Updated at : 15 Jun 2019 5:42 AM (IST)
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जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल : इलाज को अस्पतालों में भटकते रहे मरीज

पटना : जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन व एम्स रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर बुलाये गये एक दिवसीय हड़ताल का असर पीएमसीएच में देखने को मिला. पीएमसीएच में महज 1234 मरीज ही ओपीडी में आये. इनमें भी महज 900 मरीजों का ही इलाज हुआ, बाकी मरीज बिना इलाज के ही लौट गये. ए इसके साथ ही […]

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पटना : जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन व एम्स रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर बुलाये गये एक दिवसीय हड़ताल का असर पीएमसीएच में देखने को मिला. पीएमसीएच में महज 1234 मरीज ही ओपीडी में आये. इनमें भी महज 900 मरीजों का ही इलाज हुआ, बाकी मरीज बिना इलाज के ही लौट गये.

ए इसके साथ ही 48 ऑपरेशन नहीं हो पाये. नतीजा आम से लेकर गंभीर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ गया. वहीं, एमबीबीएस व पीजी की कक्षाएं भी स्थगित कर दी गयी.
जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में जड़ा ताला, आधे हुए रजिस्ट्रेशन : आम दिनों के तरह शुक्रवार को ओपीडी संचालित हो रहा था. लेकिन सुबह 10 बजे जूनियर डॉक्टर ओपीडी में पहुंच गये और हंगामा करना शुरू कर दिया. डॉक्टरों ने ओपीडी के मरीजों को बाहर कर ताला लगा दिया.
इसके बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बैठे कर्मियों को हटा काउंटर भी बंद कर दिया. ऐसे में रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया गया. दो घंटे ओपीडी बंद होने के बाद फिर से अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी का ताला खुलवाया तो इलाज शुरू हुआ. ऐसे में आम दिनों में 2300 से 2500 आने वाले मरीज की तुलना में सिर्फ 1234 मरीजों का ही इलाज किया गया.
70 की जगह 22 ऑपरेशन ही हुए : हड़ताल के दिन पीएमसीएच में कुल 70 ऑपरेशन होने थे. लेकिन डॉक्टरों ने सिर्फ 22 छोटे-बड़े ऑपरेशन ही किये. बाकी 48 ऑपरेशन अगले दिन के लिए टाल दिये गये. नहीं होने वाले ऑपरेशन में सबसे अधिक कान, नाक व गला विभाग, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, हड्डी और सर्जिकल विभाग शामिल हैं. चारों तीनों ही विभाग में सबसे अधिक ऑपरेशन होने थे जो अगले दिन के लिए डॉक्टरों ने टाल दिये हैं.
वार्डों में हाहाकार मरीज लाचार
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर वार्डों में भर्ती मरीज पर पड़ा. क्योंकि हड़ताल की आड़ में नर्स व आउटसोर्सिंग कर्मी भी ड्यूटी से गायब देखे गये. जबकि हर वार्ड में एक सीनियर नर्स के साथ तीन-चार आउटसोर्सिंग की नर्सों को लगाया जाता है. हड़ताल के दिन वार्ड सीनियर नर्सों के सहारे रहे. राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक, टाटा वार्ड और हथुआ वार्ड में कम ही नर्स देखी गयी. मेडिसिन, सर्जरी, आर्थोपेडिक आदि वार्डों की भी यही स्थिति थी. इंजेक्शन लगवाने, दवा देने और स्लाइन चढ़ाने जैसे काम के लिए भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था.
नहीं मिली ट्रॉली, गोद में उठाकर मरीज को ले गये परिजन
वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा. पैथोलॉजी जांच से लेकर रेडियोलॉजी जांच व डॉक्टर से वार्ड में दिखाने के लिए मरीजों को ट्रॉली तक नहीं मिल पायी. इस तरह का नजारा सात से ली खुशी नाम की एक बच्ची के साथ भी हुआ. पटना के मसौढ़ी की रहने वाली खुशी का एक पैर टूट गया है. एक्सरे जांच के लिए पिता वकील शाह ने गोद में उठाकर अपनी बच्ची को एक्सरे जांच कराया.
एम्स के सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रहे हड़ताल पर
फुलवारीशरीफ. शुक्रवार को पटना एम्स में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. इस दौरान ओपीडी सेवा प्रभावित रही. हालांकि सारे ऑपरेशन हुए. जूनियर डाॅक्टर एम्स प्रशासनिक भवन के सामने में हाथ मे तख्ती लेकर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. इसके बाद एम्स फैकल्टी एसोसिएशन ने अपातकालीन बैठक कर घटना की घोर निंदा की.
एनएमसीएच : 30 ऑपरेशन टले
पटना सिटी : जूनियर डॉक्टरों हड़ताल का असर नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में भी दिखा. इलाज कराने के लिए 1300 से अधिक नये पुराने मरीजों ने पंजीयन कराया था. सुबह एक घंटे की ओपीडी में महज 300 मरीजों का ही उपचार हो पाया. वहीं, दस मरीजों को भर्ती किया गया. लगभग 30 मरीजों के ऑपरेशन होने थे. लेकिन हड़ताल की वजह से सभी ऑपरेशन टाल दिये गये.
इन सब के बीच हड़ताली चिकित्सकों ने विभागों में सीनियर की ओर से चलाये जा रहे ओपीडी सेवा को घूम-घूम कर बंद कराया. उन्होंने अस्पताल के शिशु रोग विभाग, मेडिसिन विभाग, सर्जरी आदि विभागों में चल रहे ओपीडी सेवा को बाधित करा दिया. इस दौरान उन्होंने धरना भी दिया. अस्पताल के अधीक्षक डॉ चंद्रशेखर का कहना है कि सुबह में ओपीडी सेवा चली.
जूनियर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र
देश भर के सभी अस्पतालों में सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाये
अगर डॉक्टर के साथ किसी तरह की कोई घटना होती है तो उसका रिस्क खुद स्वास्थ्य विभाग व सरकार ले
डॉक्टरों के लिए एक कानून देश भर में लागू हो
मेडिकल की पढ़ाई के दौरान भरे जाने वाले बॉन्ड को पुन: विचार किया जाये
ब्रिज कोर्स के नियम को तुरंत हटाया जाये
सरकारी अस्पतालों में निजीकरण को बढ़ावा नहीं दिया जाये
बंगाल में डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना और उनको समर्थन देने के लिए जूनियर व सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने एक दिवसीय हड़ताल की. आज से जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आयेंगे. मांगें पूरी नहीं हुईं, तो फिर बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनायी जायेगी.
डॉ विनय कुमार यादव, रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन बिहार
एबीवीपी का आक्रोश मार्च
पटना. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, पटना महानगर ने कोलकाता में डॉक्टरों पर हुए हमले के विरोध में बीएन कॉलेज से आक्रोश मार्च निकाला. इसमें शामिल लोगों ने बंगाल सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कारगिल चौक पहुंचकर ममता बनर्जी का पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया.
जिला संयोजक अभिषेक कुशवाहा व पटना महानगर मंत्री रजनीश सिंह ने सम्मिलित रूप से कहा कि एनआरएस मेडिकल कॉलेज, कोलकाता में डॉक्टरों पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया है.
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